आशा व स्वास्थ्यकर्मियों के भुगतान में फंसा तकनीकी पेंच

आशा व स्वास्थ्यकर्मियों के भुगतान में फंसा तकनीकी पेंच

अगस्त 2025 से लंबित है प्रोत्साहन राशि, एसएनए स्पर्श मॉडल व पीएफएमएस की खामियों पर उठाए सवाल

लखीसराय. राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ ”सेवांजलि” ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत कार्यरत कर्मियों व आशा कार्यकर्ताओं को तकनीकी समस्याओं का बहाना बनाकर उनके हक की प्रोत्साहन राशि से वंचित रखा जा रहा है. संघ के महामंत्री विकास कुमार ने प्रेस रिलीज जारी कर बताया कि विगत अगस्त 2025 से स्वास्थ्य कर्मियों को प्रोत्साहन राशि का भुगतान नहीं किया गया है. लंबे समय से मानदेय न मिलने के कारण आशा कार्यकर्ताओं में सरकार के प्रति व्यापक रोष व्याप्त है.

एसएनए स्पर्श मॉडल व पीएफएमएस की बाधाएं

महामंत्री ने बताया कि बिहार सरकार के वित्त विभाग द्वारा ”एसएनए स्पर्श मॉडल” के माध्यम से ही कोषागार द्वारा विपत्र (बिल) पारित करने संबंधी दिशा-निर्देश जारी किए गए थे. इसी के आलोक में प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों द्वारा आशा कार्यकर्ताओं व राज्य स्वास्थ्य समिति के अधीन कार्यरत कर्मियों का विपत्र कोषागार में भेजा गया और वहां से पारित भी किया गया. मगर विडंबना यह है कि पारित होने के बावजूद यह विपत्र लगभग 18 दिनों से भुगतान के लिए लंबित है. तकनीकी पोर्टल पर इसे या तो ”पेंडिंग एट पीएफएमएस” दिखाया जा रहा है या फिर ”रिजेक्टेड बाय पीएफएमएस पेमेंट प्रोसेस” प्रदर्शित हो रहा है.

वित्तीय वर्ष की समाप्ति पर बढ़ी चिंता

संघ ने कहा कि इतने लंबे समय तक भुगतान को लंबित रखना घोर आश्चर्य व निंदा का विषय है. तकनीकी समस्या का हवाला देकर पिछले आठ महीनों से आशा कार्यकर्ताओं को उनकी मेहनत की राशि से दूर रखा गया है. चूंकि वर्तमान वित्तीय वर्ष समापन पर है, ऐसी स्थिति में सरकार को सार्वजनिक रूप से यह आदेशित करना चाहिए कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के संविदागत कर्मियों व आशा कार्यकर्ताओं को मार्च 2026 तक का मानदेय व प्रोत्साहन राशि का भुगतान तत्काल कर दिया जाय. भुगतान न होने से कर्मियों के सामने आर्थिक संकट की एक नयी समस्या खड़ी हो गयी है.

31 मार्च तक बकाया मानदेय भुगतान की मांग

महासंघ ने इस मामले में सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है. संघ ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि हर हाल में 31 मार्च से पहले सभी कर्मियों का मानदेय व प्रोत्साहन राशि का भुगतान सुनिश्चित किया जाना चाहिए. यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गयी, तो कर्मियों का आक्रोश और बढ़ सकता है. इस मुद्दे को लेकर संगठन द्वारा सरकार के पास नयी शिकायत दर्ज कराई गयी है.

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