थाना क्षेत्र में ग्रामीण कार्य विभाग द्वारा निर्मित सड़कों के रखरखाव को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी है. ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण के बाद पंचवर्षीय अनुरक्षण मद में राशि स्वीकृत होने के बावजूद समय पर मरम्मत कार्य नहीं कराया जा रहा है. इसके कारण क्षेत्र की कई सड़कें समय से पहले ही जर्जर हो गई हैं और लोगों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
8.21 लाख अनुरक्षण राशि के बावजूद सड़क बदहाल
बरियारपुर पंचायत सरकार भवन को जोड़ने वाली 1.200 किलोमीटर लंबी सड़क की स्थिति बेहद खराब हो चुकी है. योजना स्थल पर लगे बोर्ड के अनुसार, इस सड़क का निर्माण 4 जून 2021 को पूरा हुआ था, जिस पर करीब 49 लाख रुपये खर्च किए गए थे. बोर्ड पर पंचवर्षीय अनुरक्षण के लिए 8 लाख 21 हजार रुपये की राशि भी अंकित है. ग्रामीणों का कहना है कि पांच साल पूरे होने से पहले ही सड़क पूरी तरह जर्जर हो गई है. जगह-जगह बने गड्ढों के कारण राहगीरों को रोजाना कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है.
अनुरक्षण राशि के उपयोग पर उठे सवाल
स्थानीय लोगों का आरोप है कि अनुरक्षण कार्य केवल कागजों तक सीमित रह जाता है और धरातल पर मरम्मत का कोई काम नहीं दिखता. ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पंचवर्षीय अनुरक्षण राशि का पारदर्शी तरीके से उपयोग नहीं किया जा रहा है तथा संवेदक और विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से राशि का दुरुपयोग हो रहा है.
जांच और तत्काल मरम्मत की मांग
ग्रामीणों ने ग्रामीण कार्य विभाग के वरीय अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच कराने, सड़क की तत्काल मरम्मत करवाने और अनुरक्षण राशि के उपयोग की जांच की मांग की है, ताकि लोगों को सुरक्षित और सुगम आवागमन की सुविधा मिल सके.
क्या कहते हैं कनीय अभियंता
इस संबंध में ग्रामीण कार्य विभाग के कनीय अभियंता ब्रजेश कुमार ने कहा, "उक्त रोड को ड्रॉप कर दिया गया है." हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि जब अनुरक्षण के लिए 8.21 लाख रुपये स्वीकृत हैं तो सड़क को "ड्रॉप" कैसे किया जा सकता है. उन्होंने सवाल उठाया कि अनुरक्षण मद की राशि का उपयोग आखिर कहां हुआ.
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