बिहार दिवस पर नीलोत्पल मृणाल की प्रस्तुति ने बांधा समां
बिहार दिवस पर नीलोत्पल मृणाल की प्रस्तुति ने बांधा समां
By Rajeev Murarai Sinha Sinha | Updated at :
लोक कवि ने कविता, गीत व व्यंग्य से जीवंत किया ग्रामीण परिवेश, नन्हे कलाकार हर्षित राज ने भी जीता सबका दिल
लखीसराय. स्थानीय नगर भवन में आयोजित तीन दिवसीय बिहार दिवस 2026 कार्यक्रम के दूसरे दिन संध्या में भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस अवसर पर प्रसिद्ध लोक कवि एवं प्रख्यात लेखक नीलोत्पल मृणाल ने अपनी आकर्षक प्रस्तुति से उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया. अपने कार्यक्रम के दौरान श्री मृणाल ने कविता, गीत, हास्य व व्यंग्य के माध्यम से ग्रामीण जीवन की सजीव झलक प्रस्तुत की. उन्होंने अपने अनुभवों व सरल शैली में ग्रामीण परिवेश से जुड़ी ज्ञानवर्धक बातें साझा कीं, जिससे दर्शक भाव-विभोर हो उठे. उनकी इस प्रस्तुति ने न केवल लोगों का मनोरंजन किया, बल्कि उन्हें अपने गांव-समाज की पुरानी यादों से भी जोड़ दिया.
हंसी और संवेदना का अनूठा संगम
कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने नीलोत्पल मृणाल की प्रस्तुति की जमकर सराहना की. उनकी कविताओं व तीखे हास्य-व्यंग्य ने जहां दर्शकों को हंसने पर मजबूर कर दिया, वहीं उनकी संवेदनशील अभिव्यक्ति ने लोगों के मन को गहराई से छू लिया. पूरे कार्यक्रम के दौरान सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजता रहा. नगर भवन में सांस्कृतिक उत्साह की एक नयी लहर देखने को मिली.
नन्हे कलाकार हर्षित राज की जिलाधिकारी ने की प्रशंसा
मुख्य आकर्षणों के बीच एक छोटे बच्चे हर्षित राज द्वारा भी स्टेज पर सुरीला गीत गाया गया. हर्षित की गायकी सुनकर उपस्थित दर्शक मंत्रमुग्ध हो गये. बालक के शानदार प्रदर्शन व गजब के आत्मविश्वास की सराहना जिलाधिकारी द्वारा भी की गयी. जिला प्रशासन ने इस नन्ही प्रतिभा को भविष्य के लिए प्रोत्साहित किया.
सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने की पहल
बिहार दिवस 2026 के अवसर पर आयोजित इस प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रम न केवल हमारी समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने का कार्य करते हैं, बल्कि समाज में आपसी जुड़ाव व जागरूकता को भी बढ़ावा देते हैं. कार्यक्रम की सफलता से जिला प्रशासन की व्यवस्थाओं की हर ओर चर्चा की गयी.
पदाधिकारी व नागरिक रहे मौजूद
इस विशेष अवसर पर जिला प्रशासन के वरीय पदाधिकारी, कर्मी, बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक, विद्यार्थी, बुद्धिजीवी व अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे. इस कार्यक्रम के माध्यम से बिहार की कला व संस्कृति को एक नयी पहचान देने की सफल कोशिश की गयी है.