लखीसराय में नीरा से बदली जीविका दीदियों की तकदीर

ताड़ी व्यवसाय की जगह नीरा उत्पादन को अपनाकर लखीसराय की जीविका दीदियां आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रही हैं

रामनगर अमहरा में नये बिक्री केंद्र का किया गया शुभारंभ

लखीसराय

ताड़ी व्यवसाय की जगह नीरा उत्पादन को अपनाकर लखीसराय की जीविका दीदियां आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रही हैं. शनिवार को सदर प्रखंड के रामनगर अमहरा गांव में ‘सुरज जीविका महिला नीरा उत्पादक समूह’ द्वारा संचालित नीरा उत्पादन सह बिक्री केंद्र का शुभारंभ किया गया. जिसका उद्घाटन जीविका दीदी अनीता देवी ने फीता काटकर किया. उद्घाटन के साथ ही यहां 23 जीविका दीदियों को सीधे रोजगार मिला है. मौके पर अनीता देवी ने कहा, “नीरा बेचकर अब हम सम्मान से जी रही हैं. पहले ताड़ी बेचने पर समाज में हीन भावना से देखा जाता था, लेकिन नीरा ने हमें पहचान और इज्जत दोनों दी है.”

बता दें कि जिले में पिछले पांच वर्षों से नीरा उत्पादन का काम चल रहा है. वर्तमान में कुल सात नीरा उत्पादक समूह सक्रिय हैं. रामगढ़ चौक के तेतरहाट गांव में पहले से ही तीन नीरा उत्पादन सह बिक्री केंद्र सफलतापूर्वक संचालित हो रहे हैं. वहीं हलसी और सूर्यगढ़ा प्रखंड में भी नये केंद्र खोलने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है.

क्या है नीरा और क्यों है खास?

नीरा, ताड़ के पेड़ से निकलने वाला प्राकृतिक रस है जो बिना नशे का होता है. इसमें कैल्शियम, आयरन और विटामिन प्रचुर मात्रा में पाये जाते हैं. गर्मी के मौसम में यह शरीर को ठंडक देने के साथ-साथ ऊर्जा भी देता है. ताड़ी के विपरीत, नीरा को स्वास्थ्यवर्धक पेय के रूप में मान्यता मिली है.

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लेखक के बारे में

By Rajeev murarai sinha sinha

राजीव मुरारी सिन्हा लखीसराय में प्रिंट माध्यम में 23 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. अभी प्रभात खबर के लखीसराय कार्यालय में कार्यरत हैं. सामाजिक सरोकार, अपराध, शिक्षा, राजनीतिक खबरों में रुचि रखते हैं.

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