Hasanpur School Waterlogging : जिला मुख्यालय से महज 500 मीटर की दूरी पर स्थित मध्य विद्यालय हसनपुर इन दिनों बदहाली की कहानी बयां कर रहा है. बरसात के दिनों में पूरा विद्यालय परिसर तालाब में तब्दील हो जाता है. जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण आसपास की नालियों का गंदा पानी सीधे स्कूल परिसर में भर जाता है. इससे परिसर में स्थायी जलजमाव बना रहता है और विद्यार्थियों को गंदे पानी से होकर कक्षाओं तक पहुंचना पड़ता है.
संक्रमण का खतरा, मच्छरों का बढ़ा प्रकोप
जलजमाव के कारण विद्यालय परिसर में मच्छरों का प्रकोप तेजी से बढ़ गया है. ऐसे में डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा लगातार बना हुआ है. अभिभावकों का कहना है कि बच्चों की सेहत पर इसका सीधा असर पड़ सकता है, लेकिन मजबूरी में उन्हें इसी माहौल में पढ़ाई करनी पड़ रही है.
शौचालय बंद, छात्राओं की सबसे ज्यादा परेशानी
विद्यालय के शौचालय जलजमाव के कारण पूरी तरह अनुपयोगी हो चुके हैं. स्थिति ऐसी है कि छात्र-छात्राओं और शिक्षकों को शौच के लिए आसपास के घरों का सहारा लेना पड़ रहा है. इसका सबसे अधिक असर छात्राओं पर पड़ रहा है, जिन्हें असुविधा और गरिमा से जुड़े गंभीर संकट का सामना करना पड़ रहा है.
डीएलएड परीक्षा से बढ़ा दबाव, चरमराई व्यवस्था
स्थिति तब और जटिल हो गई जब हसनपुर उच्च विद्यालय को डीएलएड परीक्षा केंद्र बनाए जाने के कारण वहां के विद्यार्थियों और शिक्षकों को अस्थायी रूप से मध्य विद्यालय हसनपुर में स्थानांतरित कर दिया गया. छात्रों की संख्या बढ़ने से सीमित संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ गया है. कक्षाओं के संचालन से लेकर मध्याह्न भोजन वितरण तक की व्यवस्था प्रभावित हो रही है.
वर्षों से लंबित समस्या, अब नगर परिषद से उम्मीद
विद्यालय के प्रभारी के अनुसार यह समस्या नई नहीं, बल्कि वर्षों पुरानी है. कई बार शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन को लिखित रूप से जानकारी दी गई, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकला. स्थानीय लोगों ने तत्काल जल निकासी, शौचालयों की मरम्मत और विद्यालय परिसर को जलजमाव से मुक्त कराने की मांग की है. जिला शिक्षा पदाधिकारी यदुवंश राम ने कहा कि जलजमाव की समस्या का समाधान नगर परिषद के माध्यम से कराया जाएगा. इसके लिए संबंधित विभाग को पत्र भेजकर साफ-सफाई और जल निकासी की व्यवस्था कराने की पहल की जाएगी, ताकि बच्चों को परेशानी का सामना न करना पड़े.
