भाकपा नेता ने की मामले में राज्य सरकार से उच्च स्तरीय जांच की मांग
लखीसरायजिले के विद्यालयों में खेल सामग्री खरीद के नाम पर व्यापक अनियमितता एवं धांधली की गंभीर आशंका सामने आयी है. आरोप है कि खेल सामग्री बाजार दर से कहीं अधिक कीमत पर खरीदी गयी है, जिससे सरकारी राशि के दुरुपयोग की संभावना प्रबल हो गयी है. स्थिति और भी चिंताजनक तब हो जाती है जब यह तथ्य सामने आता है कि जिन विद्यालयों के पास खेल का मैदान तक नहीं है, वहां भी क्रिकेट जैसी खेल सामग्री की खरीद दर्शायी गयी है. साथ ही स्थानीय बाजार के बजाय बाहर के विक्रेताओं के बिल लगाये जाने से पूरे मामले की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं. उपरोक्त बातें भाकपा नेता सह अधिवक्ता रजनीश कुमार ने शुक्रवार को एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कही. उन्होंने कहा कि मार्च माह में धन निकासी एवं व्यय को लेकर “मार्च लूट” का संगठित खेला होने की आशंका जतायी जा रही है. उन्होंने कहा कि विद्यालयवार राशि के वितरण एवं निकासी की प्रक्रिया भी अत्यंत संदेहास्पद प्रतीत होती है. उन्होंने कहा कि कई विद्यालय प्रधानों ने अपनी पहचान गुप्त रखने की शर्त पर बताया कि शिक्षा विभाग के अधिकारियों द्वारा भयादोहन कर उनका आर्थिक शोषण किया गया है. विभागीय कार्रवाई के डर से वे चुप रहने और आंख मूंदकर कार्य करने को विवश हैं. बताया गया कि पूर्व में विद्यालय भवन मरम्मत, शौचालय निर्माण, बिजली कार्य एवं बेंच-डेस्क आपूर्ति के नाम पर शिक्षा विभाग में करोड़ों रुपये के घोटाले सामने आ चुके हैं, परंतु अब तक ठोस कार्रवाई का अभाव बना हुआ है. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी लखीसराय ने इस पूरे मामले को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार को पत्र लिखकर उच्च स्तरीय एवं निष्पक्ष जांच की मांग की है. उनकी मुख्य मांगों में खेल सामग्री खरीद की उच्च स्तरीय जांच करायी जाय, दोषी अधिकारियों एवं आपूर्तिकर्ताओं पर कठोर कार्रवाई हो, विद्यालयवार राशि वितरण एवं निकासी की जांच की जाय, भयादोहन एवं आर्थिक शोषण की शिकायतों की स्वतंत्र जांच हो, भविष्य में पारदर्शी एवं जवाबदेह खरीद प्रणाली लागू की जाने की बात शामिल है.
