आदिवासी समाज ने जल लेकर की पूजा, स्वतंत्रता संग्राम में वीर तिलका के योगदान को किया याद
बहादुरगंज. नगर पंचायत बहादुरगंज के सोनारदिघी में बुधवार को तिलका मांझी जयंती व धनुष पूजा कार्यक्रम का आयोजन किया गया. वनवासी कल्याण आश्रम शारदा जागरण विभाग के छोटू टुडू की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में आदिवासी समाज की गुरु माताओं और बहनों ने सरना नदी से पवित्र जल लाकर पूजा स्थल तक पहुंचाया. इसके बाद गुरु माता व गुरु बाबा द्वारा तिलका मांझी के चित्र के समक्ष पारंपरिक धनुष पूजा संपन्न की गयी. कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष पवन अग्रवाल व वनवासी कल्याण आश्रम के जिला सचिव गौतम प्रसाद पोद्दार ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया. अतिथियों ने तिलका मांझी, भगवान शंकर और भारत माता के चित्र पर पुष्प अर्पित कर नमन किया. इस अवसर पर गुरु माता और गुरु बाबा को सम्मानित भी किया गया. पूर्व अध्यक्ष पवन अग्रवाल ने अपने संबोधन में कहा कि आदिवासी समाज को अपनी सांस्कृतिक जड़ों और सनातन धर्म के प्रति निष्ठा रखते हुए आगे बढ़ने की जरूरत है.ब्रिटिश दमन के खिलाफ पहली जीत के नायक थे तिलका मांझी
जिला सचिव गौतम प्रसाद पोद्दार ने तिलका मांझी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे एक महान स्वतंत्रता सेनानी थे, जिन्होंने ब्रिटिश हुकूमत के अत्याचारों के खिलाफ बिगुल फूंका. उनका जन्म 11 फरवरी 1750 को भागलपुर के सुल्तानगंज में एक संथाल परिवार में हुआ था. वर्ष 1784 में उन्होंने भागलपुर के मजिस्ट्रेट क्लीवलैंड को तीर से मार गिराया था, जो अंग्रेजों के खिलाफ आदिवासियों की पहली बड़ी जीत थी. जल, जंगल और जमीन के अधिकारों की रक्षा के लिए उनका संघर्ष आज भी हमें प्रेरणा देता है.कार्यक्रम को जिला सहसचिव राजेश किसको, जिला संगठन मंत्री दुर्गा उरांव और भाजपा नगर अध्यक्ष किसलय सिन्हा ने भी संबोधित किया. इस आयोजन को सफल बनाने में छबिलाल मुर्मू, अनिल मुर्मू, मोहन टुडू, राजकुमार मुर्मू, चंदा हांसदा सहित बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग शामिल थे. वक्ताओं ने याद दिलाया कि उनकी स्मृति में ही भागलपुर विश्वविद्यालय का नाम तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय रखा गया है.
