किशनगंज : सातवें वेतन आयोग को लागू करने और समान काम के बदले समान वेतन समेत लंबित मांगों को लेकर बिहार के शिक्षकों ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर डिजिटल आंदोलन चलाया. राज्य के अलग-अलग जिलों से बड़ी संख्या में शिक्षकों ने अभियान में हिस्सा लिया. शिक्षकों के अनुसार अभियान से जुड़ा हैशटैग ग्लोबल ट्रेंडिंग सूची में नंबर एक तक पहुंच गया.
हजारों पोस्ट से सोशल मीडिया पर छाया अभियान
रविवार सुबह से ही बिहार के विभिन्न जिलों में कार्यरत शिक्षक लगातार एक्स पर अपनी मांगों से जुड़े पोस्ट, तस्वीरें और वीडियो साझा करते रहे. कुछ ही घंटों में बड़ी संख्या में पोस्ट और प्रतिक्रियाएं आने लगीं, जिससे शिक्षकों की मांगों का मुद्दा सोशल मीडिया पर प्रमुखता से सामने आया.
शिक्षकों ने सातवें वेतन आयोग का लाभ देने, वेतन विसंगतियां दूर करने और प्रोन्नति के अवसरों के साथ समान काम के बदले समान वेतन लागू करने की मांग उठायी.
वर्षों पुरानी है वेतन संबंधी मांग
शिक्षक संगठनों और विभिन्न शिक्षक समूहों की ओर से लंबे समय से समान वेतन, बेहतर सेवा शर्तों और वेतन विसंगतियां खत्म करने की मांग की जाती रही है. शिक्षकों का कहना है कि स्कूलों में पठन-पाठन के साथ परीक्षा, नामांकन, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और विभागीय कार्यों में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है.
उनका कहना है कि अलग-अलग श्रेणियों के शिक्षकों के बीच वेतन और सेवा शर्तों का अंतर बना हुआ है, जिसे दूर किया जाना चाहिए.
‘सिर्फ वेतन नहीं, सम्मान और समानता की मांग’
डिजिटल अभियान में शामिल शिक्षकों ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले शिक्षकों को आर्थिक सुरक्षा और सम्मानजनक वेतन मिलना जरूरी है. वर्षों से लंबित मांगों का स्थायी समाधान अब होना चाहिए.
शिक्षकों ने सरकार से सातवें वेतन आयोग का लाभ देने और वेतन संबंधी विसंगतियों को दूर करने के लिए ठोस पहल करने की मांग की.
धरने से सोशल मीडिया तक पहुंचा आंदोलन
शिक्षकों का कहना है कि आंदोलन अब सिर्फ धरना, प्रदर्शन और ज्ञापन तक सीमित नहीं है. सोशल मीडिया के जरिये बिहार के गांवों, कस्बों और शहरों में कार्यरत शिक्षक एक मंच पर अपनी आवाज उठा रहे हैं.
ग्लोबल ट्रेंडिंग में अभियान के शीर्ष पर पहुंचने का दावा सामने आने के बाद शिक्षकों का उत्साह बढ़ा है. अब उनकी नजर सरकार के अगले कदम पर है कि सातवें वेतन आयोग और समान काम के बदले समान वेतन की मांग पर कब तक कोई ठोस निर्णय लिया जाता है.
शिक्षकों ने कहा कि उनका संघर्ष केवल वेतन बढ़ाने का मुद्दा नहीं, बल्कि समानता, सम्मान और बेहतर भविष्य से जुड़ा है.
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