सीमांचल के चाय बागानों पर लूपर कैटरपिलर का कहर, महंगी दवा भी हो रही बेअसर

Tea Garden Pest Attack: किशनगंज के ठाकुरगंज में चाय बागानों पर लूपर कैटरपिलर का प्रकोप बढ़ गया है. महंगी कीटनाशक दवाएं भी बेअसर साबित हो रही हैं, जिससे चाय उत्पादक किसानों में उत्पादन घटने और आर्थिक नुकसान की चिंता बढ़ गई है.

ठाकुरगंज (किशनगंज) से बच्छराज नखत की रिपोर्ट:

Tea Garden Pest Attack: सीमांचल के चाय उत्पादक किसानों के लिए इस वर्ष चुनौतियां लगातार बढ़ती जा रही हैं. पहले अल्पवर्षा और फिर बेमौसम बारिश से जूझ रहे किसानों के सामने अब लूपर कैटरपिलर का गंभीर प्रकोप नई परेशानी बनकर उभरा है. यह कीट चाय की नई और कोमल पत्तियों को तेजी से नुकसान पहुंचा रहा है. किसानों का दावा है कि महंगी कीटनाशक दवाओं का छिड़काव करने के बावजूद इस पर अपेक्षित नियंत्रण नहीं हो पा रहा.

नई पत्तियों पर सबसे ज्यादा हमला

चाय उत्पादकों के अनुसार लूपर कैटरपिलर नई पत्तियों को तेजी से खाकर पौधों की बढ़वार रोक रहा है. इसका सीधा असर चाय की गुणवत्ता और उत्पादन पर पड़ने लगा है. लगातार बढ़ते नुकसान से किसान चिंतित हैं और कृषि विशेषज्ञों तथा विभागीय अधिकारियों से समाधान की उम्मीद लगाए हुए हैं.

बढ़ रही लागत, घटने लगा उत्पादन

चाय उत्पादक अरुण सिंह, संजय साह, दिलीप साह, सूरज गुप्ता और ओम प्रकाश साह ने बताया कि पहले भी कीटों का प्रकोप होता था, लेकिन इस बार स्थिति अधिक गंभीर है. अलग-अलग कंपनियों की महंगी कीटनाशक दवाओं का कई बार छिड़काव करने के बावजूद कीटों पर प्रभावी नियंत्रण नहीं हो रहा है. इससे उत्पादन लागत बढ़ रही है, जबकि फसल को लगातार नुकसान पहुंच रहा है.

विशेषज्ञों ने जताई उत्पादन घटने की आशंका

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि लूपर कैटरपिलर चाय की कोमल पत्तियों को काटकर खाता है, जिससे पत्तियों में बड़े-बड़े छेद हो जाते हैं. इससे पौधों की प्रकाश संश्लेषण क्षमता प्रभावित होती है और उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ता है. समय रहते प्रभावी नियंत्रण नहीं किया गया तो पूरे बागान की गुणवत्ता और उपज प्रभावित हो सकती है.

जलवायु परिवर्तन को भी माना जा रहा कारण

खेती से जुड़े जानकारों का मानना है कि अनियमित वर्षा, बढ़ते तापमान और नमी में बदलाव के कारण मैदानी क्षेत्रों के चाय बागानों की पारिस्थितिकी प्रभावित हुई है. यही कारण है कि लूपर कैटरपिलर जैसे कीट तेजी से फैल रहे हैं. वहीं भारी बारिश के कारण मिट्टी की उर्वरता और पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर भी असर पड़ा है.

किसानों ने की तत्काल हस्तक्षेप की मांग

चाय उत्पादकों ने कृषि विभाग, चाय बोर्ड और कृषि वैज्ञानिकों से प्रभावित क्षेत्रों का वैज्ञानिक सर्वे कराने, प्रभावी नियंत्रण तकनीक उपलब्ध कराने और कारगर कीटनाशकों की व्यवस्था करने की मांग की है. किसानों का कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो सीमांचल के चाय उत्पादन पर गंभीर संकट खड़ा हो सकता है.

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By Shruti Kumari

श्रुति कुमारी एक पत्रकार और डिजिटल कंटेंट राइटर हैं। उन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से अंग्रेजी पत्रकारिता में स्नातकोत्तर डिप्लोमा प्राप्त किया है। वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं। उन्हें विभिन्न प्लाटफॉर्म्स पर डिजिटल पत्रकारिता और कंटेंट राइटिंग का लगभग दो वर्षों का अनुभव है। सामाजिक मुद्दों, महिला सशक्तिकरण, राजनीति, शिक्षा और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लिखना उनकी विशेष रुचि का क्षेत्र है। इसके अलावा वे डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए स्क्रिप्ट राइटिंग करती हैं तथा हिंदी कविता और अंगिका भाषा में लेखन का भी शौक रखती हैं। प्रकृति से उनका विशेष लगाव है और वे मानती हैं कि संवेदनशील, तथ्यपरक और जनसरोकार से जुड़ी पत्रकारिता समाज में सकारात्मक बदलाव का माध्यम बन सकती है।

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