सैनिक कैंप के लिए जमीन मापी का भारी विरोध, ग्रामीणों ने उखाड़ फेंका सिस्टम
सैनिक कैंप के लिए जमीन मापी का भारी विरोध, ग्रामीणों ने उखाड़ फेंका सिस्टम
सकोर मौजा में सीमांकन करने पहुंची पुलिस-प्रशासन व सेना की टीम को बैरंग लौटना पड़ा
बहादुरगंज. नटुआपाड़ा पंचायत के सकोर मौजा में प्रस्तावित सैनिक कैंप के निर्माण को लेकर मंगलवार को भारी हंगामा हुआ. सीमांकन करने पहुंची पुलिस-प्रशासन और सेना के अधिकारियों की टीम को ग्रामीणों के कड़े विरोध का सामना करना पड़ा. स्थिति इस कदर तनावपूर्ण हो गयी कि उग्र भीड़, विशेषकर महिलाओं ने जमीन मापी के लिए लगाए गए रडार और सिस्टम को उखाड़ फेंका. बिगड़ते हालात को देखते हुए प्रशासनिक टीम को बिना कार्य किए ही वापस लौटना पड़ा.किसानों के हितों की अनदेखी का आरोप
मौके पर जुटे ग्रामीणों का कहना था कि सरकार सैनिक कैंप के नाम पर छोटे-छोटे किसानों की उपजाऊ जमीन का जबरन अधिग्रहण करना चाहती है. विरोध कर रहे लोगों ने तर्क दिया कि किशनगंज जिले में कई जगहों पर बिहार सरकार की सैकड़ों एकड़ परती जमीन उपलब्ध है, लेकिन प्रशासन जानबूझकर घनी आबादी वाले गांव के नजदीक छावनी बनाने पर तुला है. ग्रामीणों ने साफ लहजे में कहा कि वे अपनी पुश्तैनी जमीन किसी भी कीमत पर नहीं देंगे.अधिकारियों के सामने महिलाओं ने दिखाया कड़ा रुख
जैसे ही प्रशासनिक अधिकारियों ने स्थल पर आधुनिक मापी यंत्र और रडार सिस्टम को खेत में उतारा, वहां मौजूद महिलाओं की भीड़ ने उसे घेर लिया और विरोध शुरू कर दिया. देखते ही देखते भीड़ उग्र हो गई और सरकारी सिस्टम को उखाड़ कर फेंक दिया. सुरक्षा के लिहाज से मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात था, लेकिन ग्रामीणों की एकजुटता के आगे प्रशासन ने पीछे हटना ही मुनासिब समझा.कई थानों के अधिकारी प्रशासनिक टीम में भूमि सुधार उप समाहर्ता शिवशंकर पासवान, एसडीपीओ गौतम कुमार, बहादुरगंज सीओ आशीष कुमार सिंह, कोचाधामन सीओ प्रभाष कुमार, बहादुरगंज थानाध्यक्ष संदीप कुमार और कोचाधामन थानाध्यक्ष रंजय कुमार सिंह सहित भारी संख्या में पुलिस जवान शामिल थे. हालांकि, इस पूरे विवाद और ग्रामीणों के रुख पर प्रशासनिक अधिकारी फिलहाल कुछ भी बोलने से बच रहे हैं.
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