ठाकुरगंज (किशनगंज) से बच्छराज नखत की रिपोर्ट:
Smart Meter Bihar: सरकारी विद्यालयों में लगाए गए स्मार्ट प्रीपेड बिजली मीटर कई स्कूलों के लिए नई चुनौती बनते जा रहे हैं. रिचार्ज समाप्त होते ही बिजली आपूर्ति बाधित हो रही है, जिससे भीषण गर्मी के बीच बच्चों की पढ़ाई, पेयजल व्यवस्था और मध्याह्न भोजन (एमडीएम) जैसी बुनियादी सुविधाएं प्रभावित हो रही हैं.
प्रमुख समस्याएं
जानकारी के अनुसार अधिकांश सरकारी विद्यालयों में गर्मी की छुट्टियों के दौरान स्मार्ट मीटर लगाए गए थे. विद्यालय खुलने के बाद कई प्रधानाध्यापकों और शिक्षकों को तब इसकी जानकारी हुई, जब अचानक बिजली आपूर्ति बंद हो गई और पता चला कि स्मार्ट मीटर का बैलेंस समाप्त हो चुका है. इसके बाद कई विद्यालयों में पंखे बंद हो गए, पानी की मोटर ठप पड़ गई और दैनिक शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित होने लगीं.
पढ़ाई के साथ पेयजल और एमडीएम पर असर
शिक्षकों का कहना है कि सरकारी विद्यालयों के बिजली बिल का भुगतान शिक्षा विभाग की निर्धारित प्रक्रिया के तहत किया जाता है. ऐसे में समय पर रिचार्ज नहीं होने का सीधा असर विद्यालय संचालन पर पड़ता है. बिजली नहीं रहने से पेयजल की आपूर्ति बाधित होती है, रसोई तक पानी नहीं पहुंच पाता और मध्याह्न भोजन तैयार करने में भी परेशानी आती है. भीषण गर्मी में बिना पंखे के कक्षाओं में बैठना बच्चों के लिए मुश्किल हो जाता है.
सरकार का उद्देश्य ऊर्जा प्रबंधन को आधुनिक बनाना
शिक्षा विभाग सभी प्रारंभिक, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों में स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने के साथ-साथ ऊर्जा विभाग के सहयोग से सोलर पैनल भी स्थापित कर रहा है. योजना के अनुसार दिन में विद्यालयों की बिजली की जरूरत सौर ऊर्जा से पूरी होगी, जबकि अतिरिक्त बिजली ग्रिड में जाएगी. इससे स्मार्ट मीटर के माध्यम से बिजली खर्च में कमी आने और विद्यालयों के ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की उम्मीद है.
बिजली विभाग ने दिया समाधान का भरोसा
ठाकुरगंज के विद्युत एसडीओ ने बताया कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर और सोलर सिस्टम एक-दूसरे के पूरक हैं. उन्होंने कहा कि जिन विद्यालयों में अभी सोलर पैनल स्थापित नहीं हुए हैं और स्मार्ट मीटर का रिचार्ज समाप्त हो गया है, वे तत्काल स्थानीय विद्युत कार्यालय से संपर्क करें. विभाग उनकी समस्या का शीघ्र समाधान कर बिजली आपूर्ति बहाल करेगा.
बच्चों की सुविधा सर्वोपरि
अभिभावकों और शिक्षकों का कहना है कि जब तक सभी विद्यालयों में सोलर प्रणाली पूरी तरह कार्यशील नहीं हो जाती और विभागीय भुगतान व्यवस्था नियमित नहीं हो जाती, तब तक सरकारी विद्यालयों की बिजली आपूर्ति बाधित नहीं होनी चाहिए. उनका मानना है कि शिक्षा, पेयजल और मध्याह्न भोजन जैसी मूलभूत सुविधाएं किसी तकनीकी या प्रशासनिक कारण से प्रभावित नहीं होनी चाहिए.
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