टीबी उन्मूलन की निर्णायक लड़ाई और एनसीडी की बढ़ती चुनौती, जिला स्वास्थ्य तंत्र की साझा, गंभीर रणनीति पर मंथन

बैठक एनसीडी कार्यालय परिसर में संपन्न हुई.

संक्रामक एवं गैर-संक्रामक रोग नियंत्रण को एकीकृत करने की दिशा में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक

किशनगंज

जिले में टीबी जैसे संक्रामक रोगों के उन्मूलन और गैर-संक्रामक रोगों (एनसीडी) की बढ़ती गंभीर चुनौती से प्रभावी ढंग से निपटने के उद्देश्य से आज एक संयुक्त समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया. बैठक की अध्यक्षता डॉ. उर्मिला कुमारी गैर-संक्रामक रोग पदाधिकारीएवं डॉ. संचारी रोग पदाधिकारी डॉ मंजर आलम ने की. बैठक एनसीडी कार्यालय परिसर में संपन्न हुई.

टीबी उन्मूलन—स्वास्थ्य व्यवस्था की सर्वोच्च प्राथमिकता

संचारी रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ मंजर आलम ने बताया कि टीबी आज भी समाज के कमजोर वर्गों को सर्वाधिक प्रभावित करने वाला संक्रामक रोग है. समय पर पहचान, पूर्ण उपचार, पोषण सहयोग और नियमित फॉलो-अप में किसी भी प्रकार की शिथिलता अस्वीकार्य है. अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि टीबी-मुक्त जिला का लक्ष्य तभी संभव है जब फील्ड-स्तर तक जवाबदेही तय हो और उपचार अनुपालन शत-प्रतिशत सुनिश्चित किया जाए.

एनसीडी—एक शांत लेकिन गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट

गैर संचारी रोग पदाधिकारी डॉ उर्मिला कुमारी ने समीक्षा के दौरान यह भी बताया गया कि मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, स्ट्रोक और कैंसर जैसे गैर-संक्रामक रोग तेजी से आम आबादी में फैल रहे हैं. ये रोग दीर्घकालिक, खर्चीले और जानलेवा सिद्ध हो रहे हैं. इसलिए प्रारंभिक स्क्रीनिंग, जीवन-शैली में सुधार, नियमित दवा सेवन और सतत निगरानी को और सुदृढ़ करना अब अनिवार्य हो चुका है.बैठक में संक्रामक रोग नियंत्रण कार्यक्रम एवं गैर-संक्रामक रोग नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत चल रही गतिविधियों स्क्रीनिंग कवरेज, उपचार, रेफरल, दवा उपलब्धता, रिपोर्टिंग और फॉलो-अप की बारीकी से समीक्षा की गई. जहां भी कमियां पाई गई, वहां तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए गए और समयबद्ध लक्ष्य तय किए गए.

समन्वय, अनुशासन और परिणाम—स्पष्ट संदेश

डॉ. उर्मिला कुमारी ने कहा कि एनसीडी नियंत्रण में नियमित स्क्रीनिंग और फॉलो-अप ही जटिलताओं को रोकने का सबसे प्रभावी उपाय है. वहीं सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने स्पष्ट शब्दों में बताया कि संक्रामक और गैर-संक्रामक रोगों के नियंत्रण में समन्वय, अनुशासन और परिणामोन्मुख कार्यशैली से कोई समझौता नहीं किया जाएगा. उन्होंने निर्देश दिया कि समीक्षा का आधार कागजी प्रगति नहीं, बल्कि जमीनी प्रभाव होगा.

जन-जागरूकता और व्यवहार परिवर्तन पर विशेष जोर

बैठक में यह निर्णय लिया गया कि टीबी उन्मूलन और एनसीडी नियंत्रण दोनों के लिए जन-जागरूकता अभियान, व्यवहार परिवर्तन संचार (बीसीसी) और समुदाय की भागीदारी को और मजबूत किया जाएगा. साथ ही स्वास्थ्य कर्मियों की क्षमता-वृद्धि, नियमित मॉनिटरिंग और संयुक्त समीक्षा बैठकों के माध्यम से कार्यक्रमों की गुणवत्ता सुनिश्चित की जाएगी. कुल मिलाकर, यह संयुक्त बैठक जिले में संक्रामक एवं गैर-संक्रामक रोगों के विरुद्ध चल रही लड़ाई को नई गंभीरता, स्पष्ट दिशा और ठोस रणनीति प्रदान करती है, जिससे किशनगंज को रोग-मुक्त और स्वस्थ जिला बनाने का संकल्प और सुदृढ़ हुआ.

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By AWADHESH KUMAR

AWADHESH KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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