करोड़ों से बनी प्रधानमंत्री ग्राम सड़क ने पांच साल से पहले जर्जर

ग्रामीण इलाकों को बेहतर संपर्क प्रदान करने के लिए सरकार भले ही करोड़ों रुपए पानी की तरह बहा रही हो, लेकिन धरातल पर संवेदकों की लापरवाही और घटिया निर्माण कार्य के कारण योजनाएं दम तोड़ रही हैं

किशनगंज ग्रामीण इलाकों को बेहतर संपर्क प्रदान करने के लिए सरकार भले ही करोड़ों रुपए पानी की तरह बहा रही हो, लेकिन धरातल पर संवेदकों की लापरवाही और घटिया निर्माण कार्य के कारण योजनाएं दम तोड़ रही हैं. ताजा मामला प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (चरण-2) के तहत गाछपाड़ा से नूनिया टोली तक बनी सड़क का है, जो आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है.

2.86 करोड़ की लागत, पांच साल का मेंटेनेंस भी बेअसर

मिली जानकारी के अनुसार, इस 2.700 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण दो करोड़ 86 लाख 12 हजार 205 रुपए की भारी-भरकम लागत से किया गया था. इस परियोजना में 5 वर्षों तक सड़क के सामान्य रखरखाव (अनुरक्षण) के लिए भी 22 लाख 78 हजार 172 रुपए का बजट तय किया गया था. संवेदक (ठेकेदार) अंजार आलम द्वारा इस सड़क का निर्माण कार्य 20 मार्च 2020 को शुरू किया गया था और इसे 19 मार्च 2021 को पूर्ण घोषित कर दिया गया.

बनते ही टूटने लगी सड़क, गहरे गड्ढों में तब्दील हुआ मार्ग

कागजों पर तो काम समय से पूरा हो गया, लेकिन स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क बनने के कुछ महीने बाद ही टूटने लगी थी. वर्तमान में यह सड़क अत्यधिक जर्जर स्थिति में पहुंच चुकी है. सड़क पर जगह-जगह गहरे गड्ढे बन गए हैं, जिससे इस मार्ग से गुजरने वाले वाहनों को हर समय दुर्घटना का सामना करना पड़ रहा है. खासकर भारी वाहनों के आने-जाने के कारण स्थिति और भी भयावह हो गई है, जिससे स्थानीय लोगों में डर का माहौल है.

क्या कहते हैं स्थानीय ग्रामीण

ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण के बाद से काफी समय बीत चुका है, लेकिन आज तक इसकी मरम्मत नहीं की गई. करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद हमें गड्ढों वाली सड़क पर चलने को मजबूर होना पड़ रहा है. हमारी प्रशासन और संबंधित विभाग से मांग है कि इस सड़क की जल्द से जल्द मरम्मत कराई जाए ताकि किसी बड़ी दुर्घटना को टाला जा सके.

जांच और कार्रवाई की दरकार

पांच साल के मेंटेनेंस पीरियड के भीतर ही सड़क का इस कदर जर्जर हो जाना निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े करता है. अब देखना यह होगा कि इस मामले पर स्थानीय प्रशासन और ग्रामीण कार्य विभाग के आला अधिकारी क्या संज्ञान लेते हैं और ग्रामीणों को इस समस्या से कब तक निजात मिलती है.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Author: AMIT KUMAR SINH

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.

Tags

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >