ऐतिहासिक खगड़ा मेला की तैयारी शुरू, 25 दिसंबर से लगेगा मेला

ऐतिहासिक खगड़ा मेला की तैयारी शुरू, 25 दिसंबर से लगेगा मेला

किशनगंज. शहर के खगड़ा में हर साल लगने वाला ऐतिहासिक खगड़ा मेला एक बार फिर अपनी तैयारियों के साथ सामने आ गया है. हर साल की तरह इस बार भी मेला का आयोजन धूमधाम से किया जाएगा, और इसकी शुरुआत 25 दिसंबर से होगी. मेला परिसर की साफ-सफाई का कार्य जोर-शोर से चल रहा है, और दुकानदारों का आगमन भी शुरू हो चुका है. मेले की विशेषताएं: खगड़ा मेला में हर साल विभिन्न प्रकार की दुकानें, झूला, मौत का कुंआ, चित्रहार, जल परी जैसे आकर्षण होते हैं, जो यहां आने वाले दर्शकों को खास आकर्षित करते हैं. मेला एक महीने तक चलता है, और दूर-दूर से लोग इस मेले का हिस्सा बनने के लिए आते हैं. राजकीय मेला का दर्जा: खगड़ा मेला का इतिहास बहुत पुराना है. पहले इसे स्थानीय स्तर पर ही आयोजित किया जाता था, लेकिन अब राज्य सरकार ने इसे राजकीय मेला का दर्जा दे दिया है. इसके चलते मेले की लोकप्रियता और भी बढ़ गई है. हर साल इस मेले में राज्य और अन्य प्रदेशों से बड़ी संख्या में लोग आते हैं, और यह एक बड़े पर्यटन और सांस्कृतिक आयोजन का रूप ले चुका है. संपूर्ण तैयारी: इस बार मेले में देशी-विदेशी झूलों के अलावा बच्चों के लिए भी विभिन्न प्रकार की आकर्षक दुकानें और झूले लगाए जाएंगे, जो खासतौर पर बच्चों के लिए आकर्षण का केंद्र होंगे. मेले की व्यवस्थाओं की देखरेख करने वाले प्रमुख आयोजक सुबीर कुमार और बबलू साहा सहित अन्य लोग तैयारियों में व्यस्त हैं. वे सुनिश्चित कर रहे हैं कि मेले में आने वाले लोग एक बेहतरीन अनुभव प्राप्त कर सकें. इतिहास और विकास: खगड़ा मेला ब्रिटिश काल से ही आयोजित किया जाता रहा है. पहले इस मेले में सिर्फ स्थानीय लोग शामिल होते थे, लेकिन समय के साथ यह मेला और भी बड़ा हुआ और अब यह एक प्रमुख सांस्कृतिक आयोजन बन चुका है, जिसमें बंगाल और आसपास के दूर-दराज के क्षेत्रों से भी लोग आते हैं. हालांकि, कुछ समय तक मेले का अस्तित्व खतरे में पड़ गया था, लेकिन अब फिर से इसे पुराने गौरव को वापस दिलाने की कोशिशें चल रही हैं. आकर्षण व संस्कृति का संगम: खगड़ा मेला न सिर्फ एक मनोरंजन का साधन है, बल्कि यह स्थानीय संस्कृति और परंपरा का भी प्रतीक है. यहां आने वाले लोग न केवल मनोरंजन करते हैं, बल्कि यह आयोजन स्थानीय कारीगरों और दुकानदारों के लिए भी एक अच्छा अवसर प्रदान करता है. इस मेला के जरिए न सिर्फ स्थानीय लोगों को आनंद मिलता है, बल्कि यह मेले से जुड़े सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व को भी बढ़ावा मिलता है. मेला आयोजकों का कहना है कि इस साल मेला और भी बड़ा व आकर्षक होगा, जिसमें न केवल मनोरंजन के लिए झूलों व दुकानों का आयोजन किया जायेगा, बल्कि एक विशेष सांस्कृतिक उत्सव का आयोजन भी होगा. अब जब मेला शुरू होने में कुछ ही दिन रह गए हैं, तो लोग इसे लेकर उत्साहित हैं और इस ऐतिहासिक मेले में भाग लेने का इंतजार कर रहे हैं.

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Author: AWADHESH KUMAR

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