चुरली के भूमिहीन परिवारों ने मुख्यमंत्री से लगायी गुहार, जंगल दर्ज भूमि पर बंदोबस्त की मांग

मुख्यमंत्री से लगायी गुहार, जंगल दर्ज भूमि पर बंदोबस्त की मांग

दशकों से रह रहे परिवारों के आवेदन को अंचल कार्यालय ने भूमि की प्रकृति बताकर किया अस्वीकृत

ग्रामीणों ने समान परिस्थिति में रह रहे अन्य लोगों की तरह पट्टा या वैकल्पिक पुनर्वास देने की रखी मांग

ठाकुरगंज. चुरली पंचायत स्थित मौजा चुरली की जंगल दर्ज भूमि पर दशकों से रह रहे भूमिहीन परिवारों ने बंदोबस्त की मांग को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को आवेदन सौंपा है. समृद्धि यात्रा के क्रम में ठाकुरगंज पहुंचे मुख्यमंत्री को दिए आवेदन में ग्रामीणों ने राजस्व अभिलेख के खाता संख्या 550, खेसरा संख्या 4892 की भूमि मामले में न्यायोचित हस्तक्षेप की मांग की है. ग्रामीणों ने आवेदन में बताया कि उक्त भूमि की प्रकृति राजस्व रिकॉर्ड में जंगल दर्ज है, जबकि इसी खाता-खेसरा की जमीन के एक हिस्से पर पूर्व में करीब 50 लोगों को बंदोबस्त दिया जा चुका है. इतना ही नहीं, उन्हें इंदिरा आवास योजना के तहत आवास भी आवंटित किए गए हैं और वहां पक्के मकान बने हुए हैं. ग्रामीणों का कहना है कि उसी जमीन के शेष हिस्से पर कई भूमिहीन परिवार पिछले 40 वर्षों से कच्चे मकानों में रहकर खेती-बाड़ी कर आजीविका चला रहे हैं. लेकिन जब उन्होंने बंदोबस्त के लिए आवेदन दिया तो अंचलाधिकारी ने भूमि की प्रकृति जंगल बताते हुए उनके आवेदन को अस्वीकृत कर दिया. पीड़ित परिवारों ने मुख्यमंत्री से मामले की उच्चस्तरीय जांच कराकर समान परिस्थिति में रह रहे शेष भूमिहीन परिवारों को भी बंदोबस्त या पट्टा देने व आवश्यक होने पर वैकल्पिक पुनर्वास की व्यवस्था करने की मांग की है. आवेदन में कामल देवी, आरती देवी, रंजु देवी, पुतुल देवी, रेखा देवी सहित कई ग्रामीणों के हस्ताक्षर शामिल हैं. ग्रामीणों को उम्मीद है कि मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद उन्हें उनके रहने का कानूनी अधिकार मिल सकेगा.

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By AWADHESH KUMAR

AWADHESH KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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