-14 से 15 साल की बच्चियों को मुफ्त लगेगा सर्वाइकल कैंसर से बचाव का टीका
– कुल 13 लाख किशोरियों को टीकाकृत करने का है लक्ष्य – जिला स्तर के बाद प्रखंड स्तर पर भी अभियान होगा संचालित किशनगंजसूबे की बेटियों के सुरक्षित और सुनहरे भविष्य की दिशा में एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी कदम उठाया है. स्वास्थ्य विभाग ने सर्वाइकल कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी के खिलाफ निर्णायक जंग छेड़ते हुए प्रदेश की 13 लाख किशोरियों के लिए एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) टीकाकरण अभियान को पूरी तरह निःशुल्क करने का निर्णय लिया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस अभियान का देशव्यापी शुभारंभ शनिवार को अजमेर राजस्थान से करेंगे. प्रदेश में इस अभियान का शुभारंभ इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान, पटना से वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के माध्यम से होगा. सिविल सर्जन डॉ राज कुमार चौधरी ने कहा कि अभियान के तहत वैसी किशोरियां जिन्होंने अपना 14वां जन्मदिन मना लिया है लेकिन अभी 15 वर्ष की नहीं हुई हैं, वे सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर जाकर इस घातक सर्वाइकल कैंसर से बचाव का ””सुरक्षा कवच”” प्राप्त कर सकेंगी. यह पहल न केवल स्वास्थ्य बल्कि आर्थिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि अब तक अत्यधिक महंगा होने के कारण यह टीका केवल संपन्न परिवारों की पहुंच तक ही सीमित था. सिविल सर्जन डॉ राज कुमार चौधरी ने स्पष्ट किया है कि एचपीवी टीका पूरी तरह सुरक्षित और असरदार है. 160 देशों ने एचपीवी टीकाकरण को अपने नेशनल टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल किया है. विश्व स्वास्थ्य संगठन और भारत के राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह ने इसे प्रमाणित किया है. वर्तमान में यह टीका दुनिया के 160 देशों में सफलतापूर्वक इस्तेमाल किया जा रहा है और दिसंबर 2022 तक 50 करोड़ से अधिक खुराकें वितरित की जा चुकी हैं.टीके से रोका जा सकता है एचपीवी कैंसर संक्रमण
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ देवेंद्र कुमार ने कहा कि भारत में महिलाओं के बीच सर्वाइकल कैंसर दूसरा सबसे बड़ा खतरा बनकर उभरा है, जिसके कारण हर साल हजारों महिलाएं असमय काल के गाल में समा जाती हैं. आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2024 में देश भर में करीब 78,499 नए मामले सामने आए और 42,392 मौतें दर्ज की गईं. यह बीमारी मुख्य रूप से एचपीवी संक्रमण के कारण होती है, जिसे समय रहते केवल एक टीके के माध्यम से 93 प्रतिशत तक रोका जा सकता है.
लक्षणों की पहचान और बचाव ही एकमात्र उपाय
चूंकि इस कैंसर के शुरुआती चरण में जननेंद्रियों से असामान्य रक्तस्राव या दर्द जैसे कोई लक्षण दिखाई नहीं देते, इसलिए इसे ””साइलेंट किलर”” भी कहा जाता है. बीमारी बढ़ने पर ही वजन कम होना, पैरों में सूजन या पीठ दर्द जैसे संकेत मिलते हैं. ऐसे में बचाव ही सबसे बड़ा इलाज है. विशेषज्ञों का मानना है कि 35 से 45 वर्ष की आयु में जब महिलाएं अपने परिवार और नौकरी के लिए सबसे महत्वपूर्ण सहारा होती हैं, तब यह बीमारी उन्हें अपनी चपेट में लेती है. टीकाकरण के माध्यम से इस जोखिम को लगभग समाप्त किया जा सकता है.
डिजिटल प्लेटफॉर्म यू-विन से होगी मॉनिटरिंग
इस महाभियान को पारदर्शी और सुलभ बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग डिजिटल प्लेटफॉर्म ””यू-विन”” का सहारा ले रहा है. अभिभावक अपनी बेटियों का पंजीकरण घर बैठे या सीधे टीकाकरण केंद्र पर जाकर करा सकते हैं और टीकाकरण के पश्चात डिजिटल प्रमाणपत्र भी प्राप्त कर सकते हैं. सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह टीकाकरण पूरी तरह स्वैच्छिक है और इसके लिए माता-पिता की सहमति अनिवार्य होगी. हालांकि, टीके के बाद मामूली दर्द या हल्का बुखार जैसे सामान्य लक्षण दिख सकते हैं, जो दो-तीन दिनों में स्वतः ठीक हो जाते हैं.
