ठाकुरगंज : सरकारी विद्यालयों की मिड-डे मील योजना अब महंगाई की मार झेल रही है. सरकार बच्चों को सप्ताह में एक दिन अंडा उपलब्ध कराने के लिए प्रति अंडा पांच रुपये की राशि देती है, जबकि स्थानीय बाजार में अंडा सात से आठ रुपये प्रति पीस बिक रहा है. ऐसे में विद्यालयों के प्रधानाध्यापक और शिक्षक निर्धारित राशि में बच्चों तक अंडा पहुंचाने की चुनौती से जूझ रहे हैं.
महंगाई और सरकारी बजट के बीच बढ़ती खाई का असर अब सरकारी विद्यालयों में साफ दिखाई देने लगा है. मिड-डे मील के निर्धारित मीनू के अनुसार बच्चों को अंडा देना अनिवार्य है, लेकिन मौजूदा बाजार दर पर पांच रुपये में इसकी खरीद संभव नहीं हो रही है. कई विद्यालयों में शिक्षक व्यवस्था बनाए रखने के लिए अपनी जेब से अतिरिक्त राशि खर्च करने को मजबूर हैं.
अंडे वाले दिन बढ़ जाती है बच्चों की उपस्थिति
शिक्षकों का कहना है कि सप्ताह में जिस दिन मिड-डे मील में अंडा दिया जाता है, उस दिन विद्यालयों में बच्चों की उपस्थिति सामान्य दिनों की तुलना में अधिक रहती है. कई बच्चे अंडा मिलने की उम्मीद में स्कूल पहुंचते हैं. यदि किसी कारणवश अंडा उपलब्ध नहीं हो पाता, तो विद्यालय प्रशासन को बच्चों और अभिभावकों दोनों की नाराजगी का सामना करना पड़ता है.
अंडा नहीं देने पर शिक्षकों पर उठते हैं सवाल
विद्यालय प्रधानों का कहना है कि मिड-डे मील का मीनू निर्धारित है और उसका पालन अनिवार्य है. यदि अंडा नहीं दिया गया तो शिकायतें होती हैं और कई बार विवाद की स्थिति भी बन जाती है. ऐसे में शिक्षक बढ़ी हुई कीमत का अंतर स्वयं वहन कर योजना को प्रभावित होने से बचाने का प्रयास करते हैं.
शिक्षकों ने बताई जमीनी हकीकत
मध्य विद्यालय चेंगमारी के प्रधानाध्यापक कमल कुंडू ने कहा कि पांच रुपये में अंडा खरीदना अब संभव नहीं है. सरकार को वर्तमान बाजार दर के अनुसार प्रति अंडा निर्धारित राशि बढ़ानी चाहिए.
मध्य विद्यालय धुमगढ़ के प्रधानाचार्य श्याम यादव ने कहा कि सरकारी अभिलेखों में अंडे की कीमत आज भी पांच रुपये दर्ज है, जबकि बाजार की वास्तविक स्थिति अलग है. उन्होंने कहा कि सरकार को जमीनी हकीकत को देखते हुए बजट में तत्काल संशोधन करना चाहिए.
उत्क्रमित मध्य विद्यालय गोथरा के प्रभारी प्रधानाध्यापक चंद्रशेखर ने कहा कि बच्चों को मीनू के अनुसार अंडा उपलब्ध कराना उनकी जिम्मेदारी है, लेकिन बढ़ती कीमतों के कारण विद्यालयों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है. कई बार शिक्षकों को अपनी जेब से राशि खर्च करनी पड़ती है.
बजट बढ़ाने की उठी मांग
शिक्षकों का कहना है कि अंडे की कीमत लगातार बढ़ रही है, लेकिन मिड-डे मील के लिए निर्धारित राशि वर्षों से नहीं बढ़ाई गई है. उनका मानना है कि यदि सरकार महंगाई के अनुरूप बजट में वृद्धि नहीं करती है, तो भविष्य में योजना के प्रभावी संचालन में और कठिनाइयां आ सकती हैं.
