ठाकुरगंज से बच्छराज नखत की रिपोर्ट
करीब दो सप्ताह पहले मानिकपुर पुल धंसने से हजारों लोगों का आवागमन प्रभावित हो गया था. मरीज, छात्र, किसान और व्यापारी करीब 25 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करने को मजबूर थे. पुल की मरम्मत पूरी होने के बाद लोगों को उम्मीद थी कि उनकी परेशानी खत्म हो जाएगी, लेकिन अब एक नई समस्या सामने आ गई है.
हाइट गेज के कारण पुल पर रुक गई एम्बुलेंस
बुधवार को अस्पताल से नवजात शिशु और उसकी मां को लेकर छोटा ननकार गांव जा रही एम्बुलेंस मानिकपुर पुल पर लगाए गए हाइट गेज के नीचे से नहीं निकल सकी. चालक ने स्थिति का आकलन करने के बाद जोखिम लेने के बजाय वाहन को वापस मोड़ दिया और दूसरे रास्ते से गांव पहुंचा.
हालांकि प्रसूता और नवजात सुरक्षित घर पहुंच गए, लेकिन इस घटना ने आपातकालीन सेवाओं को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं.
पुल की सुरक्षा और आपातकालीन सेवा के बीच संतुलन का सवाल
मानिकपुर का करीब 30 वर्ष पुराना पुल जून में लगातार बारिश के बाद करीब दो फीट धंस गया था. इसके बाद पथ निर्माण विभाग ने युद्धस्तर पर मरम्मत कर पुल को फिर से चालू कराया. भारी वाहनों की आवाजाही रोकने के लिए पुल के दोनों ओर हाइट गेज लगाया गया.
ग्रामीणों का कहना है कि यदि ट्रैक्टर और पिकअप वाहन इस पुल से गुजर रहे हैं, तो एम्बुलेंस का नहीं निकल पाना तकनीकी खामी की ओर इशारा करता है.
ग्रामीणों ने उठाए कई सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि पुल की सुरक्षा जरूरी है, लेकिन ऐसी व्यवस्था भी होनी चाहिए जिससे एम्बुलेंस, दमकल और अन्य आपातकालीन सेवा के वाहन बिना किसी बाधा के गुजर सकें.
ग्रामीणों ने आशंका जताई कि यदि भविष्य में किसी गंभीर मरीज, सड़क दुर्घटना के घायल या हार्ट अटैक के मरीज को ले जा रही एम्बुलेंस इसी तरह फंस गई, तो कुछ मिनटों की देरी भी जानलेवा साबित हो सकती है.
ग्रामीणों की प्रमुख मांग
- हाइट गेज की ऊंचाई और डिजाइन की तकनीकी जांच कराई जाए.
- आपातकालीन सेवा के वाहनों के लिए निर्बाध आवागमन सुनिश्चित किया जाए.
- पुल की सुरक्षा और जनसुविधा के बीच संतुलित व्यवस्था बनाई जाए.
- भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न हो, इसके लिए स्थायी समाधान निकाला जाए.
विभाग से कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने पथ निर्माण विभाग से हाइट गेज की समीक्षा करने और आवश्यकता पड़ने पर उसमें संशोधन करने की मांग की है. उनका कहना है कि पुल की सुरक्षा महत्वपूर्ण है, लेकिन आपातकालीन सेवाओं में बाधा किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होनी चाहिए.
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