ड्रैगन फ्रूट की खेती पर पांच दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण शुरू

ड्रैगन फ्रूट की खेती पर पांच दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण शुरू

उत्तर-पश्चिमी बिहार के किसानों को वैज्ञानिक तकनीकों से किया जाएगा अवगत, आय व पोषण सुरक्षा पर जोर

पहाड़कट्टा. पोठिया प्रखंड के डॉ कलाम कृषि महाविद्यालय अर्राबाड़ी में आत्मा-दरभंगा के सौजन्य से शनिवार से पांच दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया. यह प्रशिक्षण कार्यक्रम ड्रैगन फ्रूट की खेती विषय पर केंद्रित है. प्रशिक्षण का उद्देश्य उत्तर-पश्चिमी बिहार के किसानों को ड्रैगन फ्रूट की वैज्ञानिक खेती की नवीनतम तकनीकों से अवगत कराना है. उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता डॉ बीरेंद्र प्रसाद, एसोसिएट प्रोफेसर सह वरिय वैज्ञानिक, डॉ कलाम कृषि महाविद्यालय ने की व प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि ड्रैगन फ्रूट जलवायु परिवर्तन के इस युग में किसानों के लिए एक आशाजनक विकल्प है. इसकी खेती से न केवल आय में वृद्धि होगी, बल्कि पोषण सुरक्षा भी सुनिश्चित की जा सकेगी. इस अवसर पर डॉ स्वराज कुमार दत्ता, डॉ भोला नाथ साहा, डॉ केविन क्रिस्टोफर व डॉ कृष्णा डी के समेत महाविद्यालय के वैज्ञानिक-शिक्षकगण व आत्मा-दरभंगा के प्रतिनिधिगण भी उपस्थित रहे.

प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य प्रतिभागियों को ड्रैगन फ्रूट व चाय की प्रजातियों, रोपण तकनीक, जल व पोषक प्रबंधन, कीट-रोग नियंत्रण, उत्पादन लागत, मूल्य संवर्धन व बाजार उपलब्धता की संपूर्ण जानकारी प्रदान करना है. प्रशिक्षण सत्रों का संचालन महाविद्यालय के अनुभवी वैज्ञानिकों द्वारा किया जाएगा. प्रशिक्षण कार्यक्रम के दूसरे दिन प्रतिभागियों को एक प्रगतिशील किसान के ड्रैगन-फ्रूट और चाय के बागवानी क्षेत्र का भ्रमण कराया जाएगा, जहां वे प्रत्यक्ष रूप से खेती की तकनीकों, रख-रखाव व विपणन की रणनीतियों को देख सकेंगे, किसान से संवाद कर व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करेंगे. यह प्रशिक्षण न केवल स्थानीय कृषकों व कृषि विभाग के अधिकारियों लिए लाभकारी सिद्ध होगा, बल्कि उत्तर-पश्चिमी बिहार में ड्रैगन फ्रूट व चाय जैसी उच्च मूल्य की फसल को बढ़ावा देने की दिशा में भी एक सराहनीय पहल है.

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By AWADHESH KUMAR

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