हाई रिस्क क्षेत्रों में घर-घर जाकर हो रही जांच, सात प्रखंडों के 292 गांवों पर विशेष फोकस
किशनगंज. टीबी उन्मूलन को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने जिले में 100 दिवसीय टीबी स्क्रीनिंग अभियान को व्यापक रणनीति के साथ धरातल पर उतार दिया है. इस अभियान के अंतर्गत उन गांवों व वार्डों को प्राथमिकता दी जा रही है, जहां संक्रमण का खतरा अधिक है. स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर सर्वे कर रही हैं, जिससे संभावित मरीजों की पहचान कर उन्हें तत्काल उपचार से जोड़ा जा सके.जिला यक्ष्मा नियंत्रण पदाधिकारी डॉ मंजर आलम ने बताया कि निक्षय पोर्टल के आंकड़ों के आधार पर हाई रिस्क गांवों को चिन्हित किया गया है. संदिग्ध मरीजों की जांच ट्रूनेट मशीन से की जा रही है. बीमारी की पुष्टि के लिए एक्स-रे व डायबिटीज की जांच भी अनिवार्य की गयी है, क्योंकि मधुमेह रोगियों में टीबी का जोखिम अधिक होता है.
अभियान के तहत जिले के सभी सात प्रखंडों में चरणबद्ध तरीके से कार्य हो रहा है. इसमें किशनगंज सदर के 62, ठाकुरगंज के 50, कोचाधामन के 45, बहादुरगंज के 40, पोठिया व टेढ़ागाछ के 35-35 व दिघलबैंक के 30 गांवों को शामिल किया गया है. सामुदायिक स्वास्थ्य पदाधिकारी, आशा कार्यकर्ता व अन्य स्वास्थ्यकर्मी इस माइक्रोप्लान को सफल बनाने में जुटे हैं.सिविल सर्जन डॉ राज कुमार चौधरी ने स्पष्ट किया कि उद्देश्य केवल मरीज ढूंढना नहीं, बल्कि उन्हें पूर्णतः स्वस्थ करना है. मरीजों को निःशुल्क दवाओं के साथ ”निक्षय पोषण योजना” के तहत आर्थिक सहायता भी दी जा रही है. हर मरीज का नियमित फॉलोअप किया जा रहा है ताकि दवा का कोर्स बीच में न छूटे.
डीपीएम डॉ मुनाजिम के नेतृत्व में जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है. स्वास्थ्य विभाग ने अपील की है कि यदि किसी को दो सप्ताह से अधिक खांसी, बुखार या वजन में कमी जैसे लक्षण दिखें, तो तुरंत जांच कराएं. यह 100 दिवसीय संगठित प्रयास किशनगंज को टीबी मुक्त बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित होगा.