सीमांचल से अब दिल्ली दूर नहीं, सिलीगुड़ी - गोरखपुर एक्सप्रेसवे के जरिये होगा सपना साकार

गोरखपुर से सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे के लिए डीपीआर का कार्य वर्तमान में प्रगति पर है.

एनएचएआई ने सूचना के अधिकार के तहत दी जानकारी-15 की बजाय 9 घंटे में पूरा होने वाले सफर का सपना जल्द होगा पूरा प्रतिनिधि, ठाकुरगंज सीमांचल की कायाकल्प करने की क्षमता रखने वाले गोरखपुर – सिलीगुड़ी ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस हाईवे के लिए डीपीआर बनाने का काम शुरू हो गया है. लगभग 37,हजार करोड़ की लागत से बनने वाले इस प्रोजेक्ट के एलाइनमेंट को केंद्र सरकार द्वारा पिछले दिनों मंजूरी की बात सूबे के पथ निर्माण मंत्री ने की थी जिसके बाद एनएचएआई से इस मामले में विस्तृत जानकारी मांगे जाने पर उसने केवल 1 लाइन में जबाब दिया की गोरखपुर से सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे के लिए डीपीआर का कार्य वर्तमान में प्रगति पर है.

बताते चले पथ निर्माण मंत्री की घोषणा के बाद इस आरटीआई के जरिये 10 बिन्दुओ पर जानकारी मांगी गई थी . बताते चले प्रभात खबर के संवाददाता ने इस मामले में 1 मार्च को आवेदन दिया था जिसके बाद एनएचएआई के परियोजना कार्यान्वयन इकाई गोरखपुर के द्वारा पत्रांक .11033/एनएचएआर्/पीआईयू- जीकेपी/आरटीआई 2024-25/5242 के तहत दिए जवाब में स्पष्ट रूप बताया गया है कि सिलीगुड़ी – गोरखपुर एक्सप्रेस वे के डीपीआर का कार्य वर्तमान में प्रगति पर है.

क्या है योजना

देश का पूर्वी हिस्सा का देश की राजधानी से सीधा जुड़ाव हो इसके लिए केंद्र सरकार ने पूर्वी भारत में एक बड़े और महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट सिलीगुड़ी – गोरखपुर के बीच ग्रीनफील्ड सिलीगुड़ी गोरखपुर एक्सप्रेस-वे का निर्माण करने की घोषणा की है. यह योजना देश के तीन बड़े राज्यों को आपस में जोड़ेगी और लगभग 568 किमी लंबाई में बनने वाले इस सड़क का 417 किमी हिस्सा बिहार में होगा. सड़क फोरलेन बनाई जाएगी लेकिन सिक्सलेन के हिसाब से 100 मीटर चौड़ाई में भूमि अधिग्रहित की जाएगी, ताकि भविष्य में इसे चौड़ा करना पड़े तो दिक्कत न हो. भारत माला परियोजना के अंतर्गत गोरखपुर से सिलीगुड़ी तक एक्सप्रेस वे के निर्माण पर करीब 37000 करोड़ रुपये खर्च होंगे. इस एक्सप्रेसवे का प्रस्तावित एलायनमेंट गोरखपुर के रिंग रोड से शुरू होकर बिहार के पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, शिवहर, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया और किशनगंज जिलों से होकर पश्चिम बंगाल में प्रवेश करेगा. यह एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल को बेहतर कनेक्टिविटी देगा जिससे इन राज्यों के बीच व्यापार और परिवहन को बढ़ावा मिलेगा.

मांगी गई थी ये जानकारी

आरटीआई के तहत प्रस्तावित गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे के बारे में जानकारी मंगाते हुए परियोजना के संबंध गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे परियोजना के संबंध में सरकारी अनुमोदन, अधिसूचना की प्रमाणित प्रतियां मांगी गई थी. इस दौरान इस परियोजना की कुल अनुमानित लागत के साथ विस्तृत ब्यौरा मांगा गया था जिसमें इस एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई की जानकारी मांगी गई थी वही इस परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू होने और शुरू हुई हो तो अधिग्रहित भूमि का जिलावार विवरण प्रदान करने की मांग की गई थी , आरटीआई के इस आवेदन में परियोजना के शुरू होने और पूरा होने की अपेक्षित समय-सीमा की जानकारी के साथ प्रोजेक्ट के निविदा प्रक्रिया के बारे में जानकारी मांगी गई थी. इस के साथ परियोजना के लिए वित्त पोषण के स्रोत के बारे में जानकारी मांगते हुए योजना के सरकारी वित्त पोषित होने या सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत होने की जानकारी मांगी गई थी.

जिले के विकास को मिलेगा नया आयाम

एक्सप्रेस हाइवे बनने से जिले के अटके विकास को सुपर स्पीड मिलने की प्रबल उम्मीद बनने लगी थी . वर्षो बाद यह जिले का पहला बड़ा प्रोजेक्ट माना जाने लगा था जो व्यापारिक-औद्याेगिक विकास व रोजगार के क्षेत्रों मे नए आयाम स्थापित करता. छह लेन का एक्सप्रेस हाइवे बनने के बाद स्थानीय व्यापार को गति मिलने की उम्मीद लगाये लोग बैठे थे. ऐसी आशा प्रकट की गई की एक्सप्रेस हाइवे जिले में पहले से स्थापित उद्योगों को देश के प्रमुख व्यापारिक केंद्रों में नए बाजारों से संपर्क बनाने में मील का पत्थर साबित होगा. स्थानीय उत्पाद की पहुंच बड़े शहरों तक आसान हो पाएगी. बताते चले जिले में गलगलिया के समीप हाइवे पर इंडस्ट्रियल जोन बनना प्रस्तावित है, जो रोजगार के साथ स्थानीय लोगों के लिए व्यापार के नए अवसर प्रदान करने वाला होगा.

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By AWADHESH KUMAR

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