ठाकुरगंज : ठाकुरगंज नगर पंचायत हर महीने करीब ₹13.97 लाख खर्च कर शहर की सफाई कराने का दावा करती है, लेकिन नगर पंचायत और आउटसोर्सिंग एजेंसी के बीच हुए अनुबंध की शर्तों को लेकर अब कई सवाल उठने लगे हैं. नगरवासियों का कहना है कि जब अनुबंध में 24 घंटे सफाई व्यवस्था, दो पाली में सफाई, नाइट स्वीपिंग, त्वरित कार्रवाई दल (क्यूआरटी), शिकायत निवारण प्रणाली और सफाई कर्मियों के लिए सुरक्षा उपकरण जैसी व्यवस्थाएं अनिवार्य हैं, तो इनका पालन धरातल पर कितना हो रहा है, इसकी जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए.
दो पाली सफाई और नाइट स्वीपिंग पर सवाल
अनुबंध के बिंदु-9 के अनुसार मुख्य सड़क, प्रधान सड़क और अन्य मार्गों की प्रतिदिन सफाई होनी है. आवासीय क्षेत्रों में एक पाली तथा व्यावसायिक क्षेत्रों में दो पाली सफाई और नाइट स्वीपिंग का प्रावधान है.
नगरवासियों का कहना है कि यदि नेहरू रोड, सोनार पट्टी, स्टेशन रोड, बस स्टैंड और जुबली चौक जैसे इलाके व्यावसायिक क्षेत्र हैं, तो वहां नियमित दो पाली सफाई और नाइट स्वीपिंग का रिकॉर्ड सार्वजनिक किया जाना चाहिए. उनका दावा है कि कई स्थानों पर अब भी कचरे के ढेर और गंदगी दिखाई देती है.
क्यूआरटी और शिकायत व्यवस्था पर भी उठे सवाल
अनुबंध के बिंदु-15 में वर्ष के 365 दिन, 24 घंटे सफाई व्यवस्था संचालित करने और आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए क्विक रिस्पांस टीम (क्यूआरटी) गठित करने का प्रावधान है.
वहीं, बिंदु-14 के तहत शिकायतों के निवारण के लिए प्रबंधन कर्मी नियुक्त करने और कम-से-कम दो सार्वजनिक मोबाइल नंबर जारी करने की व्यवस्था का उल्लेख है.
नगरवासियों का सवाल है कि क्यूआरटी की तैनाती और कार्रवाई का विवरण क्या है तथा शिकायत दर्ज कराने के लिए जारी किए गए हेल्पलाइन नंबर कौन-से हैं. साथ ही अब तक प्राप्त शिकायतों और उनके निस्तारण का ब्यौरा भी सार्वजनिक किया जाना चाहिए.
सफाई कर्मियों को सुविधाएं मिलने पर भी सवाल
अनुबंध के अनुसार एजेंसी को प्रत्येक सफाई कर्मी को पीपीई किट, फ्लोरोसेंट जैकेट, दस्ताने, रेनकोट, जूते और मास्क उपलब्ध कराना है. इसके अलावा वेतन बैंक खाते के माध्यम से देने तथा ईपीएफ और ईएसआईसी की सुविधा सुनिश्चित करना भी एजेंसी की जिम्मेदारी है.
स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर पंचायत को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि इन प्रावधानों का सत्यापन किस प्रकार किया जाता है.
सार्वजनिक रिपोर्ट और सामाजिक ऑडिट की मांग
नगर के प्रबुद्ध नागरिक आलोक यादव ने कहा कि नगर पंचायत को अनुबंध की सभी 18 शर्तों के अनुपालन की सार्वजनिक रिपोर्ट जारी करनी चाहिए, ताकि लोगों को यह जानकारी मिल सके कि हर महीने खर्च की जा रही राशि का लाभ धरातल पर कितना दिख रहा है.
भाजपा नेता कौशल यादव ने कहा कि यदि अनुबंध में दो पाली सफाई, नाइट स्वीपिंग और 24×7 व्यवस्था का स्पष्ट प्रावधान है, तो इसकी निगरानी व्यवस्था भी सार्वजनिक होनी चाहिए. उन्होंने पूरे अनुबंध का सामाजिक ऑडिट कराने की मांग की.
अतुल सिंह ने कहा कि नगर पंचायत को केवल भुगतान तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि सफाई कर्मियों को अनुबंध के अनुसार सभी सुविधाएं मिल रही हैं. उन्होंने अनुबंध के प्रत्येक बिंदु के स्वतंत्र सत्यापन और अनुपालन रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की.
नगरवासियों का मुख्य सवाल
नगरवासियों का कहना है कि जब अनुबंध में 18 स्पष्ट शर्तें निर्धारित हैं, तो उनके अनुपालन की निगरानी कौन कर रहा है. उनका मानना है कि नगर पंचायत को यह स्पष्ट करना चाहिए कि प्रत्येक शर्त का पालन किस प्रकार सुनिश्चित किया जा रहा है और यदि कहीं कमी है तो उसकी जवाबदेही किसकी होगी.
