एनीमिया व विटामिन की कमी वाले बच्चों का भी होगा उपचार
एनीमिया व विटामिन की कमी वाले बच्चों का भी होगा उपचार
कुपोषण के खिलाफ नयी रणनीति: अब मध्यम कुपोषित बच्चों को भी एनआरसी में मिलेगा जीवनदान
किशनगंज. जिले के बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने एक महत्वपूर्ण पहल की है. राज्य स्वास्थ्य समिति के निर्देश पर अब पोषण पुनर्वास केंद्रों (एनआरसी) की सेवाओं का विस्तार किया गया है. इसके तहत अब केवल गंभीर कुपोषित (एसएएम) ही नहीं, बल्कि चिकित्सीय जटिलता वाले मध्यम कुपोषित (एमएएम) बच्चों को भी भर्ती कर उनका उपचार और पोषण प्रबंधन किया जाएगा.गंभीर अवस्था में पहुंचने से पहले ही रुक जाएगा कुपोषण
सिविल सर्जन डॉ राज कुमार चौधरी ने बताया कि अक्सर मध्यम कुपोषित बच्चों को समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण वे गंभीर कुपोषण की श्रेणी में चले जाते हैं. अब ऐसे बच्चे जिनमें एनीमिया, रिकेट्स या विटामिन की कमी जैसी जटिलताएं होंगी, उन्हें एनआरसी में भर्ती किया जाएगा. राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 के आंकड़ों के अनुसार, बिहार में पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में दुर्बलता की दर 22.9 प्रतिशत है, जो चिंता का विषय है. इस नई नीति से बच्चों को गंभीर अवस्था में पहुंचने से पहले ही बचाना संभव होगा.एक वर्ष में 118 बच्चों ने जीती कुपोषण से जंग
एनआरसी के नोडल अधिकारी विश्वजीत कुमार ने बताया कि जनवरी से दिसंबर 2025 के दौरान जिले में कुल 118 गंभीर कुपोषित बच्चों का सफल उपचार किया गया है. इन बच्चों को चिकित्सकीय देखरेख और संतुलित आहार दिया गया, जिससे उनके वजन और स्वास्थ्य में काफी सुधार हुआ है. अब इस सफलता को मध्यम कुपोषित बच्चों तक भी ले जाया जाएगा.आशा और आंगनबाड़ी सेविकाओं को दी गई जिम्मेदारी
नए निर्देशों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए क्षेत्र में कार्यरत आशा कार्यकर्ताओं, आंगनबाड़ी सेविकाओं और एएनएम को विशेष जिम्मेदारी दी गयी है. वे अपने पोषक क्षेत्रों में चिकित्सीय जटिलता वाले मध्यम कुपोषित बच्चों की पहचान करेंगी और उन्हें शीघ्र एनआरसी तक पहुंचाएंगी. एनआरसी में भर्ती होने वाले बच्चों के संक्रमण की दर कम करने और वजन वृद्धि पर विशेष ध्यान दिया जायेगा.नये निर्देशों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए क्षेत्र में कार्यरत आशा कार्यकर्ताओं, आंगनबाड़ी सेविकाओं व एएनएम को विशेष जिम्मेदारी दी गयी है. वे अपने पोषक क्षेत्रों में चिकित्सीय जटिलता वाले मध्यम कुपोषित बच्चों की पहचान करेंगी. उन्हें शीघ्र एनआरसी तक पहुंचाएंगी. एनआरसी में भर्ती होने वाले बच्चों के संक्रमण की दर कम करने और वजन वृद्धि पर विशेष ध्यान दिया जायेगा.
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