करोड़ों का राजस्व देने वाले बस स्टैंड में प्यासे रहने को मजबूर हैं यात्री
करोड़ों का राजस्व देने वाले बस स्टैंड में प्यासे रहने को मजबूर हैं यात्री
नगर परिषद के वीर कुंवर सिंह टर्मिनल की हालत बदतर, न चापाकल है और न ही गंदगी से निजात
किशनगंज. शहर का वीर कुंवर सिंह अंतरराज्यीय बस टर्मिनल नगर परिषद के लिए हर साल करोड़ों रुपए के राजस्व का जरिया तो है, लेकिन यात्रियों के लिए यह किसी सजा से कम नहीं है. एनएच 27 पर स्थित इस महत्वपूर्ण बस टर्मिनल में बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है, जिससे प्रतिदिन हजारों यात्रियों को भारी फजीहत झेलनी पड़ती है.20 रुपये की बोतल खरीदना मजबूरी, नहीं है एक भी प्याऊ
हैरानी की बात यह है कि जिले के सबसे बड़े बस स्टैंड में यात्रियों के लिए पानी पीने की कोई व्यवस्था नहीं है. पूरे परिसर में न तो कोई सार्वजनिक प्याऊ है और न ही एक भी चालू चापाकल. भीषण गर्मी हो या सामान्य मौसम, यात्रियों को अपनी प्यास बुझाने के लिए मजबूरी में 20 रुपये खर्च कर पानी की बोतल खरीदनी पड़ती है. गरीब तबके के यात्रियों के लिए यह स्थिति काफी कष्टदायक है.गंदगी का अंबार और दुर्गंध से सांस लेना दूभर
बस टर्मिनल की साफ-सफाई की स्थिति भी नारकीय बनी हुई है. बस स्टैंड के एक कोने में स्थानीय दुकानों और होटलों का कूड़ा-कचरा डंप कर दिया जाता है. लंबे समय तक कचरा जमा रहने के कारण वहां से उठने वाली तीव्र दुर्गंध ने यात्रियों का बैठना मुश्किल कर दिया है. गंदगी के इस अंबार से न केवल संक्रमण का खतरा बना रहता है, बल्कि यात्रियों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है.यात्री शेड का अभाव, खुले आसमान में होता है इंतजार
सुविधाओं के नाम पर यहां एक अदद यात्री शेड तक उपलब्ध नहीं है. बस का इंतजार करने वाले मुसाफिरों को कड़ी धूप और बारिश के दौरान इधर-उधर दुकानों की शरण लेनी पड़ती है. करोड़ों का राजस्व वसूलने के बावजूद नगर परिषद प्रशासन द्वारा इस ओर ध्यान न देना यात्रियों व स्थानीय लोगों में आक्रोश का कारण बना हुआ है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
