छत्तरगाछ में 94 लाख की लागत से बना अस्पताल विवादों में, ग्रामीणों ने लगाया घटिया सामग्री के इस्तेमाल का आरोप
जांच प्रक्रिया पर उठा सवाल
शिकायतकर्ता सह स्थानीय ग्रामीण सब्बीर आलम ने बताया कि सुनवाई के दौरान उन्हें विभाग की ओर से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला. उन्होंने कहा कि संबंधित अधिकारियों ने बिना कार्यस्थल पर भौतिक जांच किए ही निर्माण कार्य को कागजों पर सही बता दिया व इसी आधार पर मामले को बंद कर दिया गया. प्रशासनिक रवैये से क्षुब्ध होकर उन्होंने अब जिला पदाधिकारी विशाल राज को आवेदन सौंपकर पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है.समय सीमा व लागत का गणित
जानकारी के अनुसार, प्रथम वर्गीय पशु चिकित्सालय का निर्माण 94,31,807 रुपये की लागत से कराया गया है. भवन निर्माण कार्य की शुरुआत नौ फरवरी 2025 को हुई थी. इसे नौ अगस्त 2025 तक पूर्ण किया जाना था. आरोप है कि निर्धारित समय सीमा बीतने के बाद दिसंबर माह में संवेदक द्वारा आनन-फानन में काम निपटाया गया, जिससे गुणवत्ता पर असर पड़ा है.घटिया सामग्री के प्रयोग का आरोप
ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण कार्य में निर्धारित मानकों की जमकर अनदेखी की गयी है. कार्य के प्रारंभिक चरण में लोकल बालू और घटिया निर्माण सामग्री का धड़ल्ले से उपयोग किया गया. स्थानीय लोगों के कड़े विरोध के बाद कुछ समय के लिए सुधार तो दिखा, लेकिन बाद में फिर से निम्न गुणवत्ता की सामग्री का प्रयोग शुरू कर दिया गया.सब्बीर आलम ने कहा कि मानक के अनुरूप कार्य नहीं होने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं. उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि नवनिर्मित भवन की गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच की जाए व दोषी ठेकेदार के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए. इस मामले को लेकर स्थानीय ग्रामीणों में जिला प्रशासन के प्रति काफी रोष व्याप्त है.
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