किशगनंज : कहते हैं कि स्वभाव से इंसान हमेशा हर चीज के लिए विकल्प की तलाश करता है. बिहार में शराबबंदी क्या हुई, अपने जीवन को नशे में लिप्त रखने के लिए लोगों ने विकल्प की तलाश शुरू कर दी.
विकल्प भी ऐसा खोजा, जिसके भयानक दुष्परिणाम से इंकार नहीं किया जा सकता हैं. नशे के आदी कफ सिरप, फेविकॉल, इंजेक्शन व अन्य नशीले पदार्थों इस्तेमाल करते नजर आ रहे है. आज की तारीख में जिले के सैकड़ों लोग ड्रग्स के सेवन में मशगूल हैं.
जिले में जहां एक तरफ पूर्ण शराबबंदी को लेकर समाज में खुशी का माहौल है, वहीं दूसरी तरफ नशे की आदी हो चुकी युवा पीढ़ी अनेक तरह से नशीली चीजों का उपयोग कर रही है.
जिसका दुष्परिणाम काफी घातक साबित हो सकता है. शराबबंदी कानून लागू होने से खासकर दांपत्य जीवन में खुशी के फूल खिल उठे थे. वहीं दूसरी तरफ इन दिनों खासकर युवा पीढ़ी कफ सिरप और नशीली दवाओं की गिरफ्त में आती जा रही है. जिले के किशनगंज, कोचाधामन, बहादुरगंज, पोठिया प्रखंड सहित नेपाल की तराई इलाके की दवा दुकानों में कफ सिरप धड़ल्ले से बेचा जा रहा है. जिसे युवा इस्तेमाल करते नजर आ रहे हैं.
नशेड़ी अब हर चीज में ढूंढ़ने लगे हैं नशा
सूबे में पूर्ण शराबबंदी के बाद नशीली दवाओं का कारोबार तेजी से पांव पसार रहा है. पूर्ण शराबबंदी के बाद शराबी नशे के लिए नयी तरकीब ईजाद कर रहे हैं. नशेड़ी अब हर चीज में नशा ढुंढने लगे हैं.
बीमारी से निजात दिलाने वाली दवाओं का उपयोग धड़ल्ले से नशे के लिए किया जा रहा है. इतना ही नहीं, शराब नहीं मिलने की वजह से सुलेशन, इंक रिमूवर, आयोडेक्स व पेंट आदि को भी नशे के रूप में उपयोग में ला रहे हैं. दवा दुकानदार भी अपने फायदे के लिए बिना डॉक्टर की पर्ची देखे ही कई प्रकार की नशीली दवाएं बेच रहे हैं.
जिसमें एलर्जी से राहत दिलाने वाली दवाई से लेकर दर्द आदि की दवाओं का उपयोग युवा वर्ग नशे के रूप में करने लगे हैं. पेंटविन इंजेक्शन, कोरेक्स सिरप, स्पास्मो प्रॉक्सीवान कैप्सूल, मॉर्फिन, नाइट्रोसिन टेबलेट आदि का उपयोग नशे के लिए किया जाता है.
कहते हैं दवा दुकानदार
हमारे यहां कोई भी दवा बिना चिकित्सक की पर्ची के नहीं दी जाती. अगर किसी व्यक्ति को कोई भी तकलीफ की दवा लेनी होती है तो उसे पहले चिकित्सक से जांच कराने की सलाह दी जाती है. जबकि नशे के उपयोग में आने वाली कई दवाओं की बिक्री बंद हो चुकी है. खांसी की सिरप तो काफी समय से नहीं बेची जाती.
राजू छावड़ा, दवा दुकानदार
क्या कहते हैं चिकित्सक
मार्फिन, फोर्टविन, अल्प्राजोलम व डायजिपाम आदि का ओवरडोज लीवर के लिए खतरनाक हो सकता है. ऐसी दवाओं को नशे का साधन बनाना जिंदगी से खिलवाड़ करने के बराबर है. मेडिकल स्टोर को भी इन सभी दवाइयां जो नशे के रूप में उपयोग में लाई जाती हैं, उसे बिना डॉक्टर की सलाह के नहीं बेचें.
डॉ आरपी सिंह, डीएस, सदर अस्पताल किशनगंज
