अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहीं इस क्षेत्र की नदियां

रामबाबू, किशनगंज : ऐसा माना जाना है कि नदियों के बगैर किसी सभ्यता का सृजन नहीं हो सकता.नदिया जीवन दायनी है.नदियां आस्था की धारा है लेकिन अब ये सब बातें सिर्फ सुनने और कहने मात्र की है क्योंकि नदियों के अस्तित्व पर ही खतरा मंडरा रहा है. प्रखंड में बहने वाली कनकई और बूढ़ी कनकई […]

रामबाबू, किशनगंज : ऐसा माना जाना है कि नदियों के बगैर किसी सभ्यता का सृजन नहीं हो सकता.नदिया जीवन दायनी है.नदियां आस्था की धारा है लेकिन अब ये सब बातें सिर्फ सुनने और कहने मात्र की है क्योंकि नदियों के अस्तित्व पर ही खतरा मंडरा रहा है. प्रखंड में बहने वाली कनकई और बूढ़ी कनकई की धारा रेगिस्तान में बदल चुकी है. गाद और गंदगी ने इन नदियों को मरणासन्न स्थिति में पहुंचा दिया है.
लिहाजा हर साल अपने साथ जल प्रलय लाने वाली नदियां इस मौसम में मरणासन्न स्थिति में पहुंच गयी है. नेपाल सीमा से सटे होने के कारण दिघलबैंक प्रखंड में नदियां अपने साथ जल का भरपूर भंडार लेकर आती थी. लेकिन बीते कुछ सालों में नदियों की गहराई ही समाप्त हो गयी है लिहाजा नदियों में जल ठहरता ही नहीं है केवल बाढ़ और बरसात के मौसम में ही कुछ माह के लिए जल इन नदियों में दिखाई देता है.
कभी दिखती थी हरियाली,अब छाई है वीरानी कहा जाता है कि नेपाल इन नदियों का मायका (नैहर) है जहां से विभिन्न जलस्रोतों से पानी इकठ्ठा करती हुई ये नदियां जब भारतीय सीमाओं में प्रवेश करती थी तो पानी के साथ-साथ समृद्धि भी लाती थी नदियों के किनारे के भूमि को उपजाऊ तथा हरा-भरा रखती थी लेकिन आज स्थिति बिल्कुल उल्टी है. जो भविष्य के लिए बेहतर संकेत नहीं है.
लगातार हो रहा है अवैध खनन बालू माफियाओं ने जिस प्रकार से नदियों का दोहन किया है वो किसी से छुपा नहीं है़ आज भी कई घाटों पर चोरी-छिपे तो कहीं दिन के उजाले में भी अवैध खनन जारी है़
नदियों की बदल रही है धारा लगातार हो रहे खनन से नदियों ने अपनी धारा बदल ली है़ आंकड़ों पर गौर करे तो तीन दशक पहले जिस स्थान पर नदी का मुख्य धारा था आज नदियां वहां से 50 मीटर तक दूर खिसक गयी है तो कहीं ये आंकड़ा 100 मीटर के पार है़
प्रदूषण है बड़ा कारण
सारे गंदगी को बेरोक-टोक नदियों के किनारों पर डाला जाता है जो बाद में नदी को भरने का काम करती है और इसी कारण से नदियां पहले जैसी नहीं रही.
कम गहराई के वजह से आती है बाढ़
लगातार कम होती जा रही नदियों के गहराई भी बाढ़ का एक बड़ा कारण है़ थोड़ी सी पानी में ही ये नदियां उफनकर अपने किनारों पर कहर बरपाती है और जो भी रास्ते में आता है इसके कोप का शिकार होता है.
नदियों को बचाने की कोई योजना नहीं है धरातल पर जब बाढ़ आती है तब सरकार और प्रशासन पूरी ताकत लगा कर राहत और बचाव करती है लेकिन नदियों को जीवित रखने की कोई पहल नहीं होती़
कब साफ होगी नदियों की गाद जब तक नदियों को साफ कर उसके जल धारा को ठीक नहीं किया जायेगा तब तक नदियां निर्मल नहीं होगी.
प्रखंड के दोनों नदियां रेत के मैदान में तब्दील दिघलबैंक प्रखंड में बहने वाली कनकई और बूढ़ी कनकई को नेपाल में माता का दर्जा प्राप्त है.हर साल मकर संक्रांति के अवसर पर दोनों ही देश के हजारों श्रद्धालु सूरूंगा स्थित इसके घाट पर आस्था की डुबकी लगाकर इसे पूजते है. लेकिन यही नदी जब भारतीय सीमा में प्रवेश करती है तो केवल नाला और बालू के ढेर में तब्दील दिखती है.

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