खगड़िया. मोरकाही थाना क्षेत्र के रसौंक पंचायत स्थित प्राथमिक विद्यालय रसौंक घरारी में पदस्थापित शिक्षिका चंदन कुमारी के खिलाफ निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने प्राथमिकी दर्ज कराई है. जांच में उनके इंटरमीडिएट के प्रमाण पत्र में अंक और पिता के नाम में कथित तौर पर हेरफेर किए जाने का मामला सामने आया है. बिहार विद्यालय परीक्षा समिति, पटना से प्राप्त मूल सत्यापन रिपोर्ट के बाद इस फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ.
अंक बढ़ाने के साथ पिता के नाम में भी किया गया बदलाव
निगरानी विभाग की जांच के अनुसार शिक्षिका चंदन कुमारी, पति गौरी शंकर रजक, निवासी नवटोलिया के शैक्षणिक प्रमाण पत्र में हेरफेर किया गया था. आरोप है कि इंटरमीडिएट के अंक पत्र में उनके कुल प्राप्तांकों को बढ़ाया गया. इसके अलावा प्रमाण पत्र में पिता के नाम की जगह उनके पति गौरी शंकर रजक का नाम दर्ज पाया गया. जांच एजेंसी के अनुसार इस बदलाव के जरिए उनकी वास्तविक पहचान को छिपाने का प्रयास किया गया.
2005 में पंचायत नियोजन इकाई से हुई थी नियुक्ति
जानकारी के अनुसार चंदन कुमारी का नियोजन वर्ष 2005 में पंचायत नियोजन इकाई के माध्यम से हुआ था. पटना उच्च न्यायालय के आदेश के बाद नियोजित शिक्षकों के प्रमाण पत्रों की जांच शुरू की गई. इसी क्रम में शिक्षिका के शैक्षणिक दस्तावेजों को भी सत्यापन के लिए बिहार विद्यालय परीक्षा समिति, पटना भेजा गया.
बिहार बोर्ड के रिकॉर्ड से सामने आया अंतर
बिहार बोर्ड की मूल सत्यापन रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 1994 की इंटर परीक्षा में रोल कोड 8304 और रोल नंबर 30139 पर दर्ज छात्रा का नाम चंदन कुमारी था. हालांकि बोर्ड के रिकॉर्ड में उनके पिता का नाम छोटेलाल रजक दर्ज है, जबकि नियोजन के समय जमा किए गए दस्तावेज में पिता के नाम की जगह गौरी शंकर रजक का नाम दर्ज पाया गया. गौरी शंकर रजक शिक्षिका के पति बताए गए हैं.
578 अंक की जगह दिखाए गए 594 अंक
जांच में अंक पत्र को लेकर भी बड़ा अंतर सामने आया. बिहार बोर्ड के मूल रिकॉर्ड में चंदन कुमारी के 578 अंक दर्ज हैं, जबकि नियोजन के समय प्रस्तुत प्रमाण पत्र में उनके अंक 594 दर्शाए गए थे. इस तरह मूल रिकॉर्ड और जमा किए गए प्रमाण पत्र के अंकों में 16 अंकों का अंतर पाया गया.
धोखाधड़ी और जालसाजी की धाराओं में प्राथमिकी
मामले में निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की ओर से शिक्षिका के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश से संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है. प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है. अब नियोजन के समय जमा किए गए मूल दस्तावेजों और प्रमाण पत्रों की भी जांच की जा रही है.
नियोजन के समय सत्यापन प्रक्रिया की भी होगी जांच
पुलिस इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि वर्ष 2005 में नियोजन के दौरान शिक्षिका के शैक्षणिक प्रमाण पत्रों का सत्यापन किस स्तर पर और किस प्रक्रिया के तहत किया गया था. जांच में यह भी देखा जाएगा कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नियुक्ति हासिल करने में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं.
एसआई वरुण कुमार कर रहे मामले की जांच
मामले के अनुसंधानकर्ता मोरकाही थाना के एसआई वरुण कुमार ने बताया कि प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच की जा रही है. उन्होंने कहा कि जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों और वरिष्ठ अधिकारियों से प्राप्त निर्देश के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी. वहीं, प्राथमिकी दर्ज होने के बाद शिक्षिका के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संभावना भी बढ़ गई है.
