16 से शुरू होगा खरमास, एक महीने तक मांगलिक कार्यों पर लगेगी रोक

ठंड का असर खत्म हो और बसंत ऋतु में शादियों पर जोर दी जा रही.

विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, मुंडन, उपनयन जैसे मांगलिक कार्य नहीं होंगे गोगरी. विवाह मांगलिक कार्य के अब गिने-चुने दिन ही शेष हैं. आठ दिसंबर के बाद शादी-विवाह, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्यक्रम स्थगित हो जाएंगे. गोगरी के भोजुआ निवासी प्रकांड ज्योतिषाचार्य डॉक्टर शुभम सावर्ण ने बताया कि सूर्य के धनु राशि में प्रवेश के साथ खरमास 16 दिसंबर (मंगलवार) की दोपहर 1:27 बजे से प्रारंभ हो जायेगा. यह अवधि 14 जनवरी 2026 (बुधवार) को रात 9:19 बजे सूर्य देव के उत्तरायण होने तक चलेगी. उत्तरायण के साथ ही खरमास समाप्त होगा और मांगलिक कार्य दोबारा शुरू हो जाएंगे. ऐसे में तैयारियां भी लोग शादियों के अब फरवरी में रखना पसंद कर रहे. जिससे ठंड का असर खत्म हो और बसंत ऋतु में शादियों पर जोर दी जा रही. होटल, मैरेज हॉल, टेंट-शामियाना अभी से ही बुक हो चुके हैं. सूर्य का रथ हो जाता है धीमा पौराणिक मान्यता के अनुसार इस महीने सूर्य देव के रथ में खर अर्थात गदहे जुड़ जाते हैं, जिससे उनकी गति धीमी हो जाती है. इसे ही खरमास कहा जाता है. इस अवधि को अशुभ फलकारी माना गया है, इसलिए विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, मुंडन, उपनयन सहित कोई नया व्यापार या महत्वपूर्ण कार्य प्रारंभ नहीं करना चाहिए. सूर्य उपासना और दान का विशेष महत्व ज्योतिषाचार्य डॉक्टर शुभम सावर्ण बताते हैं कि खरमास में भगवान सूर्य की आराधना को अत्यंत शुभ माना गया है. रोज सुबह स्नान कर सूर्य देव को अर्घ्य देने, मंत्र जाप करने और दान करने से कष्ट दूर होते हैं. एवं शुभ फल मिलते हैं. इस अवधि में पवित्र नदियों में स्नान का भी विशेष महत्व बताया गया है. जरूरतमंदों को दान-दक्षिणा देना, ब्राह्मणों को भोजन कराना तथा गाय को हरी घास खिलाना शुभ माना जाता है. इससे सौभाग्य में वृद्धि होती है और सूर्य देव की कृपा बनी रहती है.

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By RAJKISHORE SINGH

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