Khagaria News: बेलदौर खगड़िया से अमित सिंह की रिपोर्ट. एशिया में मक्का उत्पादन के लिए पहचान रखने वाला बेलदौर प्रखंड इस बार मौसम की मार से कराह उठा है. कभी किसानों की समृद्धि का प्रतीक रही मक्का की फसल अब उनके लिए चिंता और नुकसान का कारण बन गई है. आंधी-तूफान, ओलावृष्टि, चिलचिलाती गर्मी और बाजार में मक्का के गिरते दामों ने किसानों की आर्थिक स्थिति को झकझोर कर रख दिया है.
आंधी और ओलावृष्टि ने तबाह कर दी तैयार फसल
बेलदौर और फरकिया क्षेत्र के किसानों ने इस बार बड़े पैमाने पर मक्का की खेती की थी. फसल खेतों में लहलहा रही थी और किसानों को अच्छी पैदावार की उम्मीद थी. लेकिन अचानक आए आंधी-तूफान और ओलावृष्टि ने खेतों में खड़ी फसल को बर्बाद कर दिया. कई किसानों की फसल जमीन पर गिर गई, जिससे उत्पादन पर भारी असर पड़ा.
किसानों का कहना है कि प्राकृतिक आपदा ने उनकी महीनों की मेहनत कुछ घंटों में खत्म कर दी. नुकसान का दर्द अभी कम भी नहीं हुआ था कि भीषण गर्मी ने हालात और खराब कर दिए.
भीषण गर्मी बनी किसानों की नई चुनौती
इन दिनों बेलदौर क्षेत्र में तेज धूप और उमस ने किसानों और मजदूरों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. खेतों में बची हुई फसल को समेटने और सुखाने का काम भी प्रभावित हो रहा है. किसान सुबह से शाम तक तपती धूप में काम करने को मजबूर हैं.
स्थानीय किसानों का कहना है कि मौसम की बेरुखी के कारण मजदूर भी खेतों में ज्यादा देर तक काम नहीं कर पा रहे हैं. इससे फसल तैयार करने में देरी हो रही है और नुकसान बढ़ता जा रहा है.
गिरते दामों ने बढ़ाई चिंता
प्राकृतिक आपदा के बाद अब मक्का के बाजार भाव ने किसानों को बड़ा झटका दिया है. किसानों का कहना है कि इस बार मक्का की कीमत इतनी कम हो गई है कि लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है. बीज, खाद, सिंचाई और मजदूरी पर भारी खर्च करने के बावजूद उन्हें उचित मूल्य नहीं मिल रहा.
कई किसानों ने बताया कि खेती के लिए उन्होंने महाजनों से कर्ज लिया था. अब फसल खराब होने और दाम गिरने के कारण कर्ज चुकाने की चिंता सताने लगी है.
सरकार और प्रशासन से मदद की मांग
किसानों का आरोप है कि सरकार और कृषि विभाग उनकी समस्याओं को लेकर गंभीर नहीं हैं. उन्होंने फसल नुकसान का सर्वे कर मुआवजा देने और मक्का का समर्थन मूल्य बढ़ाने की मांग की है.
