गोगरी (खगड़िया) से रणवीर झा की रिपोर्ट
Dowry Harassment Case: खगड़िया जिले में दहेज प्रताड़ना का एक और मामला सामने आया है. परबत्ता थाना क्षेत्र के मड़ैया ओपी अंतर्गत देवरी वार्ड 4 निवासी नाजनी खातून ने अपने पति और ससुराल पक्ष के अन्य सदस्यों पर तीन लाख रुपये अतिरिक्त दहेज की मांग को लेकर प्रताड़ित करने, मारपीट करने और घर से निकाल देने का आरोप लगाया है. पीड़िता की शिकायत पर खगड़िया महिला थाना में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और पुलिस मामले की जांच में जुट गई है.
शादी के कुछ दिन बाद शुरू हुई दहेज की मांग
पीड़िता नाजनी खातून ने महिला थाना में दिए आवेदन में बताया है कि उनकी शादी 12 जुलाई 2025 को परबत्ता थाना क्षेत्र के सलारपुर निवासी मो. अजमत के साथ हुई थी. उन्होंने कहा कि विवाह के समय उनके पिता ने अपनी आर्थिक क्षमता के अनुसार नकद राशि, जेवरात, बर्तन और अन्य घरेलू सामान उपहार स्वरूप दिए थे.
आवेदन के अनुसार शादी के कुछ समय बाद ही ससुराल पक्ष की ओर से अतिरिक्त तीन लाख रुपये दहेज की मांग की जाने लगी. मांग पूरी नहीं होने पर उन्हें लगातार मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाने लगा.
पति समेत कई लोगों पर गंभीर आरोप
पीड़िता ने अपने पति मो. अजमत, सास दुनिया खातून, ससुर मो. मंसूर, जेठानी बिरिया खातून, भैसुर मो. रहमत और अन्य परिजनों पर प्रताड़ना का आरोप लगाया है. शिकायत में कहा गया है कि विरोध करने पर उनके साथ मारपीट की गई और जानलेवा हमला करने का प्रयास किया गया.
नाजनी खातून का आरोप है कि ससुराल पक्ष ने उन्हें घर से निकाल दिया और दोबारा लौटने पर जान से मारने की धमकी भी दी. उन्होंने बताया कि मामले को सुलझाने के लिए कई बार पंचायत भी हुई, लेकिन कोई समाधान नहीं निकल सका.
महिला थाना में दर्ज हुई प्राथमिकी
घटना के बाद पीड़िता ने खगड़िया महिला थाना पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई. महिला थाना पुलिस ने आवेदन के आधार पर संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर ली है. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच की जा रही है और जांच के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
दहेज प्रथा पर फिर उठे सवाल
इस घटना ने एक बार फिर समाज में मौजूद दहेज प्रथा और उससे जुड़ी हिंसा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. कानूनन दहेज लेना और देना अपराध है, इसके बावजूद ऐसे मामले लगातार सामने आ रहे हैं. सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि दहेज के खिलाफ जागरूकता और कड़ी कानूनी कार्रवाई दोनों की जरूरत है.
