खगड़िया. जिले में पर्यटन की संभावनाओं को धरातल पर उतारने की कवायद तेज हो गई है. इसी क्रम में जिलाधिकारी विक्रम विरकर ने गुरुवार को जिले के प्रस्तावित एवं संचालित पर्यटन विकास योजनाओं की प्रगति का जायजा लेने के लिए क्षेत्र भ्रमण किया और स्थलीय निरीक्षण किया. इस दौरान उन्होंने संबंधित विभागों के अधिकारियों को जिले के धार्मिक एवं प्राकृतिक पर्यटन स्थलों का समग्र, सुव्यवस्थित और योजनाबद्ध विकास सुनिश्चित करने का निर्देश दिया.जिलाधिकारी ने सबसे पहले चौथम प्रखंड स्थित प्रसिद्ध मां कात्यायनी मंदिर परिसर का निरीक्षण किया. यहां उन्होंने पर्यटन की दृष्टि से प्रस्तावित विकास कार्यों की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की. डीएम ने मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों के लिए उपलब्ध मूलभूत सुविधाओं की जानकारी ली और आवश्यक सुधारों को लेकर अधिकारियों को निर्देश दिए. उन्होंने परिसर के सौंदर्यीकरण, स्वच्छता व्यवस्था, पेयजल सुविधा, आवागमन को बेहतर बनाने तथा अन्य आधारभूत संरचनाओं के विकास पर विशेष जोर दिया. इस दौरान एसडीओ धनंजय कुमार सहित अन्य विभागीय अधिकारी मौजूद थे। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि प्रस्तावित योजनाओं की नियमित समीक्षा करते हुए उन्हें समय पर पूरा कराया जाए, ताकि खगड़िया जिले को पर्यटन के क्षेत्र में नई पहचान मिल सके।
प्रस्तावित योजनाओं की वर्तमान स्थिति से अवगत करायानिरीक्षण के दौरान प्रभारी पदाधिकारी प्रवीण कुमार ने जिलाधिकारी को प्रस्तावित योजनाओं की वर्तमान स्थिति से अवगत कराया. उन्होंने बताया कि पर्यटन सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए विभिन्न स्तरों पर कार्ययोजना तैयार की जा रही है. डीएम ने निर्देश दिया कि सभी कार्य गुणवत्तापूर्ण तरीके से निर्धारित समय सीमा के अंदर पूरे किए जाएं, ताकि आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधा मिल सके.
कसरैया धार का निरीक्षण कियाइसके बाद जिलाधिकारी ने कसरैया धार का निरीक्षण किया और इसे आकर्षक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की संभावनाओं का आकलन किया। उन्होंने स्थल की प्राकृतिक एवं भौगोलिक विशेषताओं को ध्यान में रखते हुए विकास की कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया। डीएम ने कहा कि क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता को संरक्षित रखते हुए यहां आवश्यक सुविधाओं का विकास किया जाए, जिससे यह स्थल पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बन सके।
जिलाधिकारी ने कहा कि जिले के धार्मिक और प्राकृतिक स्थलों के सुनियोजित विकास से पर्यटन को नई गति मिलेगी। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और आर्थिक गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिलेगा। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय स्थापित कर पर्यटन विकास से जुड़े कार्यों में तेजी लाने का निर्देश दिया।
