Khagaria School Construction Probe: खगड़िया. सदर प्रखंड के गौड़ाशक्ति पंचायत स्थित उत्क्रमित उच्च विद्यालय मेहसौड़ी परिसर में निर्माणाधीन प्रयोगशाला भवन में कथित अनियमितता की शिकायत पर जिला शिक्षा पदाधिकारी अमरेंद्र कुमार गौंड ने शुक्रवार को जांच की. निरीक्षण के दौरान उन्होंने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर नाराजगी जताते हुए संबंधित अधिकारियों से विस्तृत जानकारी मांगी और आवश्यक दस्तावेज 24 घंटे के भीतर उपलब्ध कराने का निर्देश दिया.
ग्रामीणों की शिकायत पर हुई जांच
बताया गया कि गुरुवार को भवन निर्माण की गुणवत्ता को लेकर ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन किया था. इसके बाद संवेदक की ओर से निर्माण कार्य रोक दिया गया. ग्रामीणों ने जिला पदाधिकारी विक्रम विरकर से उच्चस्तरीय जांच कराने और दोषी संवेदक तथा संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की थी.
छत से टपका पानी, घटिया सामग्री का आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि भवन की ढलाई पूरी होने के मात्र 24 घंटे बाद हुई बारिश में ही छत से पानी टपकने लगा. उनका कहना है कि निर्माण में उपयोग की जा रही सामग्री भी मानक के अनुरूप नहीं है. आरोप है कि कमरों में टाइल्स लगाने के दौरान सीमेंट और बालू का अनुपात सही नहीं रखा गया, जिसके कारण टाइल्स उखड़ने लगीं. बाद में कमियों को छिपाने के लिए सीमेंट का घोल डालकर लीपापोती की गई.
दीवार का प्लास्टर हाथ से उखड़ने का आरोप
जांच के दौरान सरपंच अर्जून महतो सहित कई ग्रामीणों ने डीईओ को बताया कि भवन की दीवारों का प्लास्टर हाथ से ही उखड़ रहा है. उनका आरोप है कि प्लास्टर में बालू की मात्रा अधिक है और भवन की छत भी समतल नहीं है. ग्रामीणों ने आशंका जताई कि यदि इसी प्रकार निर्माण हुआ तो भविष्य में भवन की मजबूती प्रभावित हो सकती है.
जेई से मांगी पूरी निर्माण संबंधी जानकारी
निरीक्षण के दौरान डीईओ ने संबंधित जेई से पूछा कि प्रयोगशाला भवन किस योजना के तहत बनाया जा रहा है, इसकी प्रशासनिक स्वीकृति किसने दी, कुल लागत कितनी है, निर्माण एजेंसी कौन है तथा एनओसी किसके द्वारा जारी की गई. उन्होंने निर्माण से संबंधित सभी अभिलेख 24 घंटे के भीतर उपलब्ध कराने का आदेश दिया.
प्रभारी एचएम को भी नहीं निर्माण की पूरी जानकारी
Khagaria School Construction Probe: बताया जाता है कि विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक और स्थानीय शिक्षा अधिकारियों को भी निर्माण कार्य की पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं है. डीईओ ने स्पष्ट किया कि स्वीकृति पत्र, प्राक्कलन, एनओसी और अन्य दस्तावेजों की जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी. जांच के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण भी मौजूद रहे और निष्पक्ष तकनीकी जांच की मांग की.
