खगड़िया . शिक्षा विभाग ने सरकारी विद्यालयों के शिक्षकों द्वारा कोचिंग, निजी ट्यूशन एवं व्यावसायिक संस्थानों में पढ़ाने पर सख्त रुख अपनाया है . माध्यमिक शिक्षा निदेशक द्वारा जारी पत्र के आलोक में जिला शिक्षा पदाधिकारी अमरेन्द्र कुमार गौंड ने जिले के सभी विद्यालय प्रधानों, प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों एवं जिला कार्यक्रम पदाधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी किया है .
विद्यालयी शिक्षा प्रभावित होने की जतायी चिंता
डीईओ ने कहा है कि शिक्षकों की नियुक्ति के बाद विद्यालयों में पर्याप्त संख्या में शिक्षक उपलब्ध हैं . ऐसे में शिक्षकों की प्राथमिक जिम्मेदारी अपने पदस्थापित विद्यालय के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना है . उन्होंने कहा कि शिक्षकों द्वारा कोचिंग, निजी ट्यूशन एवं व्यावसायिक संस्थानों में पढ़ाने से विद्यालयी शिक्षा प्रभावित होती है तथा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है .कोचिंग व निजी ट्यूशन पर लगायी गयी रोक
शिक्षा विभाग ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि कोई भी सरकारी विद्यालय का शिक्षक विद्यालय परिसर अथवा अन्य स्थानों पर संचालित कोचिंग, निजी ट्यूशन एवं व्यावसायिक संस्थानों में शिक्षण कार्य नहीं करेगा . यदि कोई शिक्षक इस प्रकार की गतिविधियों में संलिप्त पाया जाता है तो इसे आचार संहिता का उल्लंघन माना जायेगा और उसके विरुद्ध कठोर अनुशासनिक कार्रवाई की जायेगी .विद्यालय प्रधानों को निगरानी का निर्देश
डीईओ ने सभी विद्यालय प्रधानों को निर्देश दिया है कि वे अपने विद्यालय के शिक्षकों की गतिविधियों पर नजर रखें . यदि कोई शिक्षक कोचिंग या निजी ट्यूशन में संलिप्त पाया जाता है तो साक्ष्य सहित प्रतिवेदन जिला शिक्षा कार्यालय को उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें . उन्होंने कहा कि यदि विद्यालय प्रधान द्वारा ऐसी जानकारी उपलब्ध नहीं करायी जाती है तो इसे उनकी संलिप्तता माना जा सकता है . इस आदेश के बाद जिले के शिक्षकों के बीच यह विषय चर्चा का केंद्र बन गया है . शिक्षा विभाग का उद्देश्य विद्यालयों में शैक्षणिक गुणवत्ता को बेहतर बनाना तथा विद्यार्थियों को नियमित एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना बताया गया है .शिक्षकों की अतिरिक्त आय का स्रोत होगा बंद
सरकारी विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के निजी कोचिंग संस्थानों में पढ़ाने पर सख्ती से रोक लगा दी गयी है . सरकार के इस निर्णय के बाद शिक्षा जगत में व्यापक चर्चा शुरू हो गयी है . विभाग का मानना है कि सरकारी शिक्षक अपनी पूरी ऊर्जा और समय विद्यालयी शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने में लगाएं, जिससे सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा मिल सके .इस निर्णय का सकारात्मक प्रभाव सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों की नियमित उपस्थिति, बेहतर शिक्षण व्यवस्था एवं विद्यार्थियों के शैक्षणिक प्रदर्शन पर पड़ने की उम्मीद जतायी जा रही है .
