फलका प्रखंड के कमलसिया गांव के पटवारी टोला में लगी भीषण अग्निकांड के दर्जनों परिवारों के आशियाने ही नहीं, बल्कि उनकी वर्षों की मेहनत, उम्मीदें और सपने भी राख हो गये. इस दर्दनाक हादसे के बाद अग्निपीड़ित परिवार कड़ाके की ठंड में खुले आसमान के नीचे जीवन बिताने को मजबूर हैं. घर-बार, कपड़े, अनाज, नगदी, जेवरात और जरूरी कागजात जलकर खाक हो गए हैं. पीड़ित परिवारों के सामने अब जीवन यापन का गंभीर संकट खड़ा हो गया है. अग्निपीड़ित प्रकाश मंडल के घर में सोमवार को ही बेटी खुशी कुमारी का तिलक समारोह होना था. घर में शादी की खुशियां थीं, बेटी के हाथ पीले करने की तैयारियां पूरी कर ली गई थी. शादी का सारा सामान खरीदा जा चुका था और तिलक के लिए रखे गए करीब दस लाख रुपये नगद भी घर में ही थे. पल भर में लगी आग ने सब कुछ छीन लिया. इस हादसे ने खुशी कुमारी के अरमानों को चकनाचूर कर दिया. घटना के बाद वह गहरे सदमे में है. बार-बार बेहोश हो जा रही है. खुशी की मां बुलबुल देवी रोते-बिलखते हुए भगवान को कोसती नजर आयी. उनका कहना था, भगवान ने सब कुछ लूट लिया. हम पूरी तरह बर्बाद हो गये. अब बेटी की शादी कैसे करेंगे. यह कहते-कहते वह बार-बार चित्कार मारकर रो पड़ती थी. उनका दर्द सुन वहां मौजूद हर आंख नम हो गयी. अग्निकांड में मुनेश्वर मंडल, वंदना कुमारी और शिक्षक रमेश मंडल की भी मेहनत की कमाई जलकर राख हो गयी. रमेश मंडल ने बताया कि खेती के लिए मक्के की फसल में खाद डालने हेतु जो रुपये जमा कर रखे थे. वे भी आग की भेंट चढ़ गये. कहा, अब मक्के में खाद कैसे देंगे. फसल बचेगी या नहीं, कुछ समझ नहीं आ रहा. उनके जैसे कई किसान परिवारों के सामने अब रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है. बहरहाल घटना के बाद पीड़ित परिवारों ने प्रशासन से तत्काल राहत, मुआवजा, ठंड से बचाव के लिए कंबल, तिरपाल और अस्थायी आवास की व्यवस्था की मांग की है. ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते सहायता नहीं मिली तो इन परिवारों के लिए इस सर्द मौसम में जीना और भी मुश्किल हो जायेगा. अग्निकांड ने पूरे गांव को गहरे शोक और चिंता में डुबो दिया है. इधर प्रखंड प्रमुख दीप शिखा सिंह, मुखिया प्रतिनिधि संजय झा, पूर्व मुखिया मनोज मंडल ने अग्निपीड़ितों से मिलकर प्रसाशन से हरसम्भव सरकारी मुआवज देने की मांग की है.
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