मानव तस्करी (Human Trafficking) पर लगाम लगाने और ट्रेनों में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने को लेकर पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (NFR) की रेलवे सुरक्षा बल (RPF) पूरी तरह मुस्तैद है. कटिहार रेल मंडल सहित NFR के विभिन्न रेल मंडलों में आरपीएफ द्वारा लगातार चलाए जा रहे रेस्क्यू अभियानों का परिणाम है कि इस वर्ष जनवरी से जून माह के बीच कुल 430 बच्चों एवं यात्रियों (महिला व पुरुष) को सुरक्षित रेस्क्यू किया गया है.
जुलाई महीने में 11 नाबालिगों को कराया गया मुक्त
आरपीएफ कर्मियों ने ट्रेनों और प्लेटफॉर्मों पर सतर्कता बरतते हुए 8 जुलाई से 20 जुलाई की अवधि के दौरान विभिन्न स्टेशनों से 11 नाबालिगों को सुरक्षित निकाला और उचित पुनर्वास के लिए संबंधित बाल कल्याण समिति (CWC) व चाइल्ड हेल्पलाइन को सौंपा:
- 18 जुलाई: न्यू अलीपुरद्वार स्टेशन से 12 वर्षीय लड़के को रेस्क्यू कर CWC को सौंपा गया.
- 19 जुलाई: न्यू बंगाईगांव में ट्रेन संख्या 22504 से 4 नाबालिग लड़कियों को रेस्क्यू किया गया.
- 19 जुलाई: किशनगंज में ट्रेन संख्या 15910 से 10 वर्षीय लड़के को बचाकर चाइल्ड हेल्पलाइन को सुपुर्द किया गया.
- कटिहार स्टेशन: कटिहार रेलवे स्टेशन से 14 वर्षीय लड़की को रेस्क्यू कर चाइल्ड लाइन, कटिहार को सौंपा गया.
- ट्रेन एस्कॉर्ट कार्रवाई: ट्रेन संख्या 12505 से 14 वर्षीय लड़की को बचाया गया तथा एक 18 वर्षीय युवक को सुरक्षित उसके पिता से मिलाया गया.
- 20 जुलाई: गोवालपारा में ट्रेन संख्या 75724 से 13 वर्षीय बालिका और कामाख्या स्टेशन पर ट्रेन संख्या 12505 से 16 वर्षीय बालिका को एनजीओ व रेलवे चाइल्ड लाइन गुवाहाटी के सहयोग से रेस्क्यू किया गया.
जनवरी से जून तक 430 लोगों का रेस्क्यू
पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी/आरपीएफ अधिकारियों के अनुसार, इस साल जनवरी से जून के छह महीनों में स्टेशनों और चलती ट्रेनों से कुल 430 असहाय व तस्करों के चंगुल में फंसे लोगों (जिनमें बहुसंख्यक बच्चे व महिलाएं हैं) को बचाया गया है.
सुरक्षित रेल यात्रा के प्रति प्रतिबद्धता: आरपीएफ अधिकारियों का कहना है कि वे बाल कल्याण समितियों, चाइल्ड हेल्पलाइन, गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) और स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर निरंतर काम कर रहे हैं. ट्रेनों में संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है ताकि मानव तस्करी और बाल श्रम जैसी कुरीतियों पर पूरी तरह नकेल कसी जा सके.
