– चुनाव के दौरान फलका के सालेहपुर, भंगहा गांव में गुजारी थी कई रातें – चुनाव हारे पर यहां के बुजुर्गों के जेहन में आज भी बसी हैं उनकी यादें अली अहमद, फलका कोढ़ा विधानसभा सुरक्षित क्षेत्र होने के कारण इस क्षेत्र से कई दिग्गजों ने विधानसभा चुनाव लड़ कर भाग्य आजमाया है. जिसमे स्व विश्वनाथ ऋषि, तीन बार चुनाव जीत कर मंत्री बने. जबकि स्व सीता राम दास भी दो बार चुनाव जीत कर मंत्री पद से गौरवनित हुए. इसके अलवा स्व महेश पासवान दो बार चुनाव जीत कर विधायक बने. लिहाजा केंद्र मंत्री लोजपा के संस्थापक रामविलास पासवान भी 1964 में कोढ़ा विधान सभा से सोशलिस्ट पार्टी से चुनाव लड़ कर भाग्य आजमाये थे. वह महेशपुर व भंगहा गांव में महीनों रहकर अपना चुनावी अभियान चलाया था. यद्यपि 1964 में वे कोढ़ा विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीतने में नाकामयाब रहे थे. उनकी यादें महेशपुर गांव के बुजुर्गों की जेहन में आज भी कैद है. महेशपुर गांव के वृद्ध शमशुल हक, मूसा, जलील खान,ने बताया कि आज भी उसे याद है. रामविलास पासवान का चुनावी प्रचार भोंपू से हुआ करता था. उनके चुनाव प्रचार वाले जुलूस में पुरूष और महिलाएं पैदल चला करती थी. समसुल ने बताया कि मेरे मरहूम पिता मु रमजानी साहब रामविलास पासवान के साथ प्रचार प्रसार में निकलते थे. उनका ठहराव भंगहा गांव के स्व जीवछ लाल मंडल के यहां भी होता था. जब प्रचार से लौटते थे तो सादा भोजन किया करते थे तथा मक्का का लावा व सरसों का साग बेहद पसंद किया करते थे. जब वे प्रचार प्रसार कर आते थे तो दरवाजे पर जो बंगला है. उसी में पुआल पर सो जाया करते थे. उनके पिता रमजान अली से उनकी अच्छी पटती थी. उनके पिता और उनके उम्र में बड़ा फासला था. स्व पासवान जब रेल मंत्रालय में थे. तो उनके सभी परिजनों के लिए 2003 तक के लिए रेलवे पास बना कर दिये थे. स्व रमजान अली गांव के लोगों का कपड़ा सीकर अपनी जीविका चलाते थे. बदकिस्मती से स्व राम विलास पासवान जी उस वक्त कोढ़ा विधानसभा क्षेत्र से चुनाव हार गए थे. पर महेशपुर के रमजान अली और भंगहा के जीवछ लाल मंडल के परिवार उनका रिश्ता हमेशा कायम रहा. भंगहा के वृद्ध उमानाथ पटेल ने बताया कि जीवछलाल मंडल स्व पासवान के कोढ़ा विधान सभा से चुनाव लडऩे को लेकर गांव के विष्णु मंडल के यहां अपना एक एकड़ भूमि दस हजार रुपये में गिरवी रख दिया था. स्व पासवान के मंत्री बनने के बाद जीवछलाल मंडल उनके निज आवास पर चार दफे मिलने गये थे. 2014 में गेनालाल मंडल के घर हुई भीषण अग्निकांड में रामविलास पासवान के यादों से जुड़ी तमाम कागज व सामान जलकर खाक हो गया.
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