नयी कृषि तकनीक से बढ़ेगी फसल उत्पादकता व किसानों की आय
नयी कृषि तकनीक से बढ़ेगी फसल उत्पादकता व किसानों की आय
By RAJKISHOR K | Updated at :
फसलों की उत्पादकता व कुपोषण से लड़ने के लिए बायोफोर्टिफाइड किस्मों के समावेश पर चर्चा, 10 केंद्रों ने प्रस्तुत की वार्षिक कार्य योजना
कटिहार. कृषि विज्ञान केंद्र कटिहार में बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के अंतर्गत संचालित 22 कृषि विज्ञान केंद्रों की ”वार्षिक कार्य योजना वर्ष 2026” कार्यशाला का सफल समापन हुआ. कार्यशाला के दूसरे दिन दस कृषि विज्ञान केंद्रों ने अपनी आगामी योजनाओं की विस्तृत प्रस्तुति दी. इस अवसर पर बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर (भागलपुर) के निदेशक प्रसार शिक्षा, डॉ. एस.के. पाठक ने संबोधित करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय ने कृषकों के हित में कई नए बीजों और उन्नत कृषि तकनीकों का ईजाद किया है. इन तकनीकों को सीधे किसानों के खेतों तक पहुंचाना अनिवार्य है. ताकि राज्य में फसलों की उत्पादकता बढ़े और किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार हो सके. अटारी, पटना के प्रधान वैज्ञानिक डॉ डीवी सिंह ने बताया कि प्रत्येक जिले के किसानों की कृषि संबंधी समस्याएं अलग-अलग होती हैं. इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य उपलब्ध तकनीक के सहारे उन स्थानीय समस्याओं का समाधान खोजना है. उन्होंने जोर देते हुए कहा कि बिहार में कुपोषण की समस्या से लड़ने के लिए ”बायोफोर्टिफाइड” किस्मों व ”पोषण वाटिका” का समावेश एक महत्वपूर्ण हथियार साबित हो सकता है. डॉ. सिंह ने विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों, अग्रिम पंक्ति प्रत्यक्षण व प्रसार कार्यक्रमों की गुणवत्ता में सुधार के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए. उल्लेखनीय है कि कटिहार जिले में इस तरह के बड़े कार्यक्रम का आयोजन पहली बार किया गया है. अतिथियों ने इस सफल आयोजन के लिए कृषि विज्ञान केंद्र कटिहार के सभी कर्मियों की सराहना की. कार्यशाला के दौरान मंच का संचालन कृषि वैज्ञानिक पंकज कुमार ने किया. कार्यक्रम में विभिन्न जिलों के कृषि वैज्ञानिक और विशेषज्ञ मुख्य रूप से उपस्थित रहे.