गंगा, कोसी नदी के किनारे तारबूज की खेती कर रहे किसान

गंगा, कोसी नदी के किनारे तारबूज की खेती कर रहे किसान

By RAJKISHOR K | April 24, 2025 6:47 PM

कुरसेला गंगा, कोसी नदी के किनारे बालू के रेत पर नगदी फसल के रूप में तरबूज की खेती किसानों को लिए वरदान साबित हो रहा है. दियारा क्षेत्र के भू-भाग पर उपयुक्त भूमि जलवायु होने से किसान इस खेती को अपना रहे हैं. तकरीबन तीन माह के खेती में मौसमी फल तरबूज बिक्री के लिए तैयार हो जाता है. मलेनियां गांव के किसान दिनेश्वर मंडल ने बताया कि खेती पर प्रति एकड़ तीस से चालीस हजार की लागत खर्च पर लगभग साठ से अस्सी हजार या उससे अधिक का लाभ मिलता है. किसानों को खेतों में फल के तैयार होने पर बाजार तक लाने में बड़ी परेशानी उठानी पड़ती है. नाव पर फलों को लेकर नदियों को पार करना पड़ता है. उसके बाद ट्रैक्टरों पर लाद कर बाजार तक बिक्री के लिए लाना पड़ता है. किसानों को आर्थिक, मानसिक रूप से परेशानियों का सामना करना पड़ता है. किसानों से मिली जानकारी के अनुसार तारबूज का फल थोक रूप से पांच से लेकर बीस रुपया प्रति किलो के दर से बिक्री होती है. स्थानीय स्तर पर फल का सीमित बाजार होता है. बाजार में फल का अधिक आवक होने से व्यापारियों किसानों ने इसे नेपाल से लेकर देश प्रदेश के शहरों तक बिक्री के लिए भेजा जाता है. फल के तैयार होकर पकने के बाद प्रतिदिन पच्चीस से पच्चास ट्रैक्टर तारबूज कुरसेला बाजार में बिक्री के लिये आता है. बाजार मांग से कई गुणा अधिक फलों के आने से कुरसेला से बाहर ट्रकों, पिकअप मालवाहक से बिक्री के लिए भेजा जाता है. जिम्मी रोड लाइन के ट्रांसपोर्टर सज्जाद अली ने बताया कि प्रतिदिन पांच से दस ट्रक तारबूज बिक्री के लिए नेपाल, कोलकाता, धुलांग, बरगछिया, पानागढ़, आसनसोल, उड़ीसा, झारखंड के रांची, छत्तीसगढ़, रायपुर, राजस्थान आदि जगहों पर ट्रकों से मंडी में बिक्री के लिए भेजा जाता है. इसी तरह प्रतिदिन छोटे पिकअप मालवाहक वाहन से गया छपरा, बलिया, खगड़िया, बेगुसराय, मधेपुरा, सहरसा, सुपौल, अररिया बिक्री के लिये भेजा जाता है.

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