कटिहार के प्रसिद्ध दुर्गास्थान चौक मंदिर में संगमरमर वाली मैया के दर्शन को उमड़ती है भीड़; नोट कर लें बुधवार की पूजा व आरती की टाइमिंग

Durga Mandir: कटिहार के हृदयस्थली कहे जाने वाले दुर्गास्थान चौक स्थित सार्वजनिक दुर्गा मंदिर की महिमा निराली है. सफेद संगमरमर से निर्मित मां दुर्गा की अलौकिक प्रतिमा के दर्शन और बुधवार को होने वाली भव्य सामूहिक आरती में शामिल होने के लिए सीमांचल भर से श्रद्धालु खिंचे चले आते हैं.

Durga Mandir: कटिहार से सूरज गुप्ता की रिपोर्ट: कटिहार जिला मुख्यालय के शहरी क्षेत्र में दुर्गास्थान चौक के समीप स्थित ऐतिहासिक व प्रसिद्ध ‘सार्वजनिक दुर्गा मंदिर’ स्थानीय लोगों की अगाध आस्था का मुख्य केंद्र है. इस मंदिर की ख्याति और धार्मिक महत्ता दूर-दूर तक फैली हुई है. यही कारण है कि आम दिनों में भी माता के दरबार में हाजिरी लगाने और पूजा-अर्चना करने के लिए सुबह से ही भक्तों का तांता लगा रहता है. ऐसी दृढ़ धार्मिक मान्यता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से इस दरबार में आकर मन्नतें मांगता है, जगत जननी मां दुर्गा उसकी हर मुराद अवश्य पूरी करती हैं.

सफेद संगमरमर से निर्मित है मां की भव्य प्रतिमा, 4 पंडितों को सौंपा गया है जिम्मा

इस मंदिर की मुख्य विशेषता यह है कि यहाँ गर्भगृह में मां दुर्गा की अत्यंत आकर्षक और शांत मुद्रा वाली प्रतिमा स्थापित है, जो पूरी तरह से कीमती सफेद संगमरमर (Marble) से निर्मित है. मंदिर की सुचारू व्यवस्था और सुगम दर्शन के लिए मंदिर प्रबंधन द्वारा अलग-अलग समय पर पूजा-अर्चना और अनुष्ठान संपन्न कराने के लिए चार अनुभवी विद्वान आचार्यों को विशेष दायित्व सौंपा गया है.

पूजा-अर्चना का जिम्मा संभालने वाले पंडितों के नाम:

  1. पंडित अजय मिश्रा
  2. पंडित सच्चिदानंद पाठक
  3. पंडित हीरा झा
  4. पंडित दिलीप झा

इन आचार्यों की देखरेख में प्रतिदिन माता का वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भव्य श्रृंगार और भोग अर्पण किया जाता है.

उमड़ती है मेले जैसी भीड़, नोट कर लें बुधवार का पूरा टाइम टेबल (Aarti & Darshan Timing)

मंदिर के मुख्य पुजारियों के अनुसार, प्रत्येक बुधवार को माता के विशेष दर्शन और सामूहिक महाआरती का आयोजन होता है, जिसमें इतनी भीड़ उमड़ती है मानो कोई मेला लगा हो. भक्तों की सहूलियत के लिए बुधवार का पूरा समय सारिणी (Time Table) इस प्रकार निर्धारित किया गया है:

  • सुबह की महाआरती: सवेरे 07:30 बजे (बुधवार सुबह)
  • प्रथम पाली (दर्शन व पूजा): सुबह 07:30 बजे से लेकर दोपहर 01:30 बजे तक भक्त जलाभिषेक, खोइछा भराई और व्यक्तिगत पूजा कर सकते हैं.
  • पट बंद होने का समय (विश्राम): दोपहर 01:30 बजे से अपराह्न 03:00 बजे तक (इस दौरान माता को भोग लगाया जाता है और पट बंद रहता है).
  • द्वितीय पाली (दर्शन व पूजा): अपराह्न (दोपहर बाद) 03:00 बजे से लेकर रात्रि 09:30 बजे तक मंदिर पुनः भक्तों के लिए खुला रहेगा.
  • संध्या महाआरती: शाम 07:30 बजे (इस सामूहिक आरती में भक्त ढोल-नगाड़ों और शंखध्वनि के बीच शामिल हो सकते हैं).

मंदिर कमेटी ने सभी श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे गर्मी को देखते हुए कतारबद्ध होकर अनुशासित तरीके से निर्धारित समय सारिणी के भीतर ही माता के दर्शन करें और पुण्य के भागी बनें.

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By Divyanshu Prashant

दिव्यांशु प्रशांत वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्होंने महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में परास्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। मीडिया क्षेत्र में लगभग एक वर्ष के अनुभव के दौरान वे दैनिक जागरण में न्यूज़ राइटर और रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं। करियर के शुरुआती दौर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़े पॉलिटिकल कंटेंट राइटिंग का विशेष अनुभव प्राप्त किया। इसके अतिरिक्त उन्होंने टी. एन. बी. कॉलेज से हिंदी साहित्य में स्नातक किया है, जिसके कारण साहित्य, पठन-पाठन, लेखन और कविता-सृजन में उनकी विशेष रुचि है। सटीक, निष्पक्ष और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना उनकी पेशेवर पहचान है।

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