कटिहार जिले के कुरसेला प्रखंड अंतर्गत अयोध्यागंज बाजार की एक बेहद महत्वपूर्ण मुख्य सड़क इन दिनों प्रशासनिक उपेक्षा और बदहाली का जीवंत उदाहरण बनी हुई है. नगर पंचायत के वार्ड संख्या 12 में स्थित यह सड़क अवैध अतिक्रमण, खुले एवं टूटे हुए नाले से निकलती बदबू और उगी हुई जंगली घासों के कारण पूरी तरह नारकीय स्थिति में तब्दील हो चुकी है. आलम यह है कि इस मार्ग पर अब पैदल चलना भी किसी चुनौती से कम नहीं है, जिससे स्थानीय दुकानदारों और राहगीरों में नगर प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश है.
डाकघर और स्टेशन को जोड़ने वाला मुख्य मार्ग ठप
भौगोलिक और व्यावसायिक दृष्टिकोण से यह सड़क अयोध्यागंज बाजार के लिए रीढ़ की हड्डी मानी जाती है:
- महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग: यह मार्ग बाजार के मुख्य व्यावसायिक क्षेत्र को सीधे तौर पर स्थानीय डाकघर (Post Office) और रेलवे स्टेशन से जोड़ता है. दैनिक रूप से यहां से हजारों लोगों का आना-जाना तय रहता था.
- आवागमन हुआ बंद: वर्तमान में सड़क की स्थिति इतनी जर्जर और संकरी हो चुकी है कि चारपहिया वाहनों की बात तो दूर, दोपहिया वाहनों और पैदल यात्रियों का भी यहां से गुजरना पूरी तरह बंद होने की कगार पर पहुंच गया है.
आधा हिस्सा अतिक्रमण की चपेट में: 12 फीट का रास्ता हुआ संकरा
स्थानीय अंचल और नगर पंचायत के सरकारी नक्शों की मानें तो इस सड़क की वास्तविक चौड़ाई करीब 12 फीट है, लेकिन जमीन पर हकीकत इसके बिल्कुल उलट है:
- पक्के निर्माण से घेराबंदी: सड़क के लगभग आधे हिस्से पर दबंगों और स्थानीय लोगों द्वारा अवैध रूप से अतिक्रमण कर लिया गया है. रास्ते के एक तरफ दो मंजिला पक्का मकान तो दूसरी तरफ अन्य पक्के भवन तान दिए गए हैं.
- सड़क पर जेनरेटर का कब्जा: भवनों के निर्माण के बाद जो थोड़ी बहुत जगह बची भी थी, उस पर व्यावसायिक उपयोग के लिए बड़े-बड़े जेनरेटर रख दिए गए हैं, जिससे सड़क संकरी गली में बदल गई है.
- लापरवाही: ग्रामीणों का आरोप है कि हाल ही में जब इस सड़क का नवनिर्माण (Repairing) कराया गया था, तब भी स्थानीय प्रशासन ने इस गंभीर अतिक्रमण को हटाने की जहमत नहीं उठाई.
खुले नाले से बीमारी का खतरा, उठ रही है महामारी की बू
सड़क की बदहाली को दोगुना करने का काम यहां का जलजमाव और ड्रेनेज सिस्टम कर रहा है:
सड़क के ठीक किनारे बने नाले के ऊपर लगे कंक्रीट के ढक्कन (स्लैब) जगह-जगह से पूरी तरह टूट चुके हैं. नाले की सफाई न होने और उसमें कचरा फंसे रहने के कारण चौबीसों घंटे वहां से असहनीय सड़ांध और बदबू निकल रही है. मानसून और बरसात के इस मौसम में नाले का गंदा पानी सड़क पर आ जाने से संक्रामक बीमारियों (महामारी) और मच्छरों का प्रकोप फैलने का खतरा अत्यधिक बढ़ गया है.
जनता की मांग: अविलंब हटे अतिक्रमण, ढका जाए नाला
बाजार के प्रबुद्ध नागरिकों और स्थानीय दुकानदारों ने जिला प्रशासन, अनुमंडल पदाधिकारी और नगर पंचायत के कार्यपालक पदाधिकारी से इस दिशा में अविलंब ठोस दंडात्मक कार्रवाई करने की मांग की है. ग्रामीणों ने साफ शब्दों में कहा है कि जब तक सड़क से पक्के अतिक्रमण को बुलडोजर चलाकर हटाया नहीं जाता और नाले पर नए ढक्कन नहीं लगाए जाते, तब तक इस लाखों की लागत से बनी सड़क की उपयोगिता शून्य रहेगी. यदि प्रशासन ने जल्द ही कोई सुध नहीं ली, तो स्थानीय लोग चरणबद्ध आंदोलन के लिए बाध्य होंगे.
