मंदिर के विकास कार्य में बाधा डालने का आरोप
मंदिर के विकास कार्य में बाधा डालने का आरोप
– न्यास बोर्ड के निर्देश पर नई समिति गठन को ले होने वाली बैठक स्थगित बारसोई विष्णु मंदिर बारसोई न्यास समिति द्वारा मंदिर के उत्तर दिशा में स्थित खाली भू-भाग पर मंदिर के विकास, आय में वृद्धि व सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कटरा (दुकान) निर्माण की प्रक्रिया शुरू की गई थी. प्रस्तावित योजना के अनुसार दुकानों के ऊपर भाग को भविष्य में विवाह भवन के रूप में उपयोग किया जाना था. छह माह पूर्व मंदिर परिसर में बैनर लगाकर सार्वजनिक सूचना दी गई थी. मंदिर न्यास समिति के सचिव अजय कुमार साहा ने बताया कि हाल ही में निर्माण कार्य प्रारंभ करने के लिए नींव की खुदाई कर ली गई थी. निर्माण सामग्री भी स्थल पर पहुंच चुकी थी. निर्माण स्थल के ठीक सामने उत्तर भाग स्थित कुछ दुकानदारों एवं घर मालिकों ने स्वयं सड़क को अतिक्रमण कर रखे हैं. मंदिर की भूमि को पांच से सात फीट छोड़ने का दबाव बनाया. न्यास समिति ने नियम सम्मत तरीके से तीन फीट जमीन छोड़कर निर्माण कराने की बात कही लेकिन इससे असंतुष्ट कुछ लोगों ने समाज के कुछ अन्य लोगों को कथित रूप से बहला-फुसलाकर निर्माण का विरोध शुरू कर दिया. आरोप है कि विरोधियों ने दुकानों के निर्माण से मंदिर की शोभा खराब होने की बात कहकर न केवल कार्य रुकवाने का दबाव बनाया बल्कि रविवार को मंदिर परिसर में आयोजित बैठक में भी अपने पक्ष के लोगों को विशेष रूप से बुलाकर हंगामा, नारेबाजी करायी. मंदिर संचालन समिति पर नई समिति गठन का दबाव बनाया गया. दबाव में आकर अगले रविवार को नई संचालन समिति गठन को लेकर पुनः बैठक बुलाने का निर्णय लिया गया तथा अन्य प्रस्ताव भी पारित कराये गये. समिति ने बिहार राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड से फोन पर संपर्क कर स्थिति की जानकारी दी. न्यास बोर्ड से स्पष्ट निर्देश दिया निर्माण मंदिर की बाउंड्री के भीतर हो रहा है, तो किसी को आपत्ति का अधिकार नहीं है. मंदिर की शोभा खराब नहीं होगी बल्कि सुरक्षा के साथ-साथ आय में भी वृद्धि होगी. कहा, नई संचालन समिति गठित करने का अधिकार केवल न्यास बोर्ड को है. न्यास बोर्ड के निर्देश के आलोक में बुधवार की शाम मंदिर परिसर में पुनः न्यास समिति की बैठक हुई. जिसमें सर्वसम्मति से निर्णय लिया रविवार को प्रस्तावित नई संचालन समिति गठन की बैठक को स्थगित किया जाय. न्यास समिति ने सामाजिक स्तर पर स्पष्ट किया कि मंदिर की भूमि पर किया जा रहा निर्माण पूरी तरह नियम सम्मत, विकासोन्मुख और मंदिर हित में है.
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