2019 में लगायी गयी टंकी आंधी में उड़ी, अब तक नहीं हुआ समुचित सुधार # जमीन के ऊपर खुले पड़े सप्लाइ पाइपलाइन का भी मिट गया नामोनिशान # पदाधिकारियों की शिथिलता से सरकार की महत्वाकांक्षी योजना बनी पंगु मोहनिया सदर. सरकार की महती योजना में शामिल मुख्यमंत्री सात निश्चय योजना प्रखंड में हाथी का दांत बनकर रह गयी है. कुछ पदाधिकारियों के ढुलमुल रवैया ने सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना को पंगु बना दिया है, जिसकी वजह से यह योजना धरातल पर सिर्फ दिखावे के लिए ही रह गयी है. स्थिति यह है कि इस योजना को सरकारी तंत्र, कुछ जनप्रतिनिधि व संवेदकों ने मिलकर पूरी तरह निचोड़ लिया है. कुछ ऐसी ही स्थिति बघिनी पंचायत के वार्ड 13 अधवार की लगभग 150 घरों की आबादी वाली मुसहर बस्ती की है, जो दुर्गावती मुख्य नहर के दक्षिण तरफ अवस्थित है. गर्मी का मौसम दस्तक देते ही यहां के लोगों को पीने के पानी की चिंता सताने लगी है. यहां वर्ष 2019 में लगायी गयी नल जल योजना कुछ दिनों तक बस्ती के लोगों की प्यास बुझाती रही, लेकिन मई 2020 में आयी तेज आंधी के कारण 5000 लीटर क्षमता वाली सिनटैक्स पानी टंकी उड़ कर जमीन पर गिर गयी व फट गयी. नियमों की बात करें तो नल जल योजना में कहीं भी किसी एजेंसी या संवेदक का कागजों में जिक्र नहीं है, लेकिन उस समय धरातल पर एजेंसियां ही हावी रही थीं, जिससे यह योजना पूरी तरह भ्रष्टाचार की सूली पर चढ़ गयी. इसके बाद वर्ष 2023 में सरकार ने इसके संचालन की जिम्मेदारी वार्ड क्रियान्वयन प्रबंधन समिति से लेकर पीएचइडी विभाग के सिर मढ़ दी, तभी से इस व्यवस्था को दुरुस्त करने की जिम्मेदारी पीएचइडी विभाग पर है, लेकिन लापरवाही की परतें इतनी मोटी हैं कि सुधार कार्य भी सुस्त रफ्तार से चल रहा है. डेढ़ किमी दूर आंगनबाड़ी व विद्यालय, शिक्षा से वंचित बच्चे सरकार भले ही दलित समुदाय के उत्थान के लिए कई दावे करती रही है, लेकिन धरातल की सच्चाई कुछ और ही नजर आ रही है. इस मुसहर बस्ती से आंगनबाड़ी केंद्र व विद्यालय की दूरी लगभग डेढ़ किलोमीटर है. नतीजतन छोटे बच्चे आंगनबाड़ी केंद्र व विद्यालय तक नियमित रूप से नहीं पहुंच पाते हैं, जिससे उनकी शिक्षा प्रभावित हो रही है. नल जल योजना के क्रियान्वयन में गाइडलाइन का भी पालन नहीं किया गया. सप्लाइ पाइपलाइन को जमीन के अंदर एक मीटर की गहराई में बिछाया जाना था, लेकिन अधिक राशि बचाने के उद्देश्य से पाइपलाइन को जमीन के ऊपर ही छोड़ दिया गया. समय के साथ खुले में पड़ी पाइपलाइन का नामोनिशान तक मिट गया. गाइडलाइन की अनदेखी करने वाली वार्ड क्रियान्वयन प्रबंधन समिति पर कार्रवाई नहीं होने से लोगों में रोष है. प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से इस योजना से जुड़े लोग मालामाल हो गये, जबकि योजना धरातल पर ध्वस्त हो गयी है. अब बस्तीवासी पेयजल व मूलभूत सुविधाओं के लिए फिर से सरकारी पहल की आस लगाये बैठे हैं. # क्या कहते हैं बस्ती के लोग – बुद्धू मुसहर ने बताया कि नल जल लगने के बाद लगभग पांच-छह महीने ही इससे पानी मि.ला उसके बाद मई 2020 में तेज आंधी आयी, जिससे पानी टंकी गिरकर क्षतिग्रस्त हो गयी, तब से आज तक टंकी नहीं लगी. – भानू मांझी ने कहा कि पीने के पानी की समस्या बहुत गंभीर है. गर्मी आते ही पानी का लेयर नीचे भाग जाता है नल जल से कभी पानी मिलता ही नहीं है. हम लोगों के छोटे बच्चें पढ़ने के लिए आंगनबाड़ी व स्कूल नहीं जा पाते हैं, क्योंकि दोनों की दूरी लगभग डेढ़ किलोमीटर पड़ती है. इससे हम लोगों के छोटे बच्चे आंगनबाड़ी की योजना और विद्यालय की शिक्षा से वंचित रह जाते हैं. – मुसहर बस्ती की यशोदा देवी कहती है कि गर्मी आते ही पानी की भीषण समस्या का सामना करना पड़ता है, लेकिन हम लोगों की समस्याओं को सुनने वाला कोई नहीं है. लोग आते हैं और नल जल योजना को सिर्फ देखकर चले जाते हैं. – शिवकुमारी देवी कहती है कि यह नल जल योजना हम लोगों के किसी काम का नहीं है. गर्मी में हम लोग भीषण जल संकट का सामना करते हैं. पानी का लेयर नीचे भाग जाता है. चापाकल भी जवाब दे देता है. सरकार पानी टंकी लगवायी है, लेकिन पांच साल पहले तेज आंधी में पानी टंकी उड़ के नीचे गिरी, तब से आज तक टंकी नहीं लगायी गयी. # बोले सहायक अभियंता इस संबंध में पूछे जाने पर पीएचइडी के सहायक अभियंता नीरज कुमार शर्मा ने कहा कि हमें इस मामले की जानकारी नहीं थी, लेकिन हम खुद इस मामले को देख लेते हैं. अब हमारे पास टीम भी उपलब्ध है. बहुत जल्द वहां नल जल योजना को चालू कर दिया जायेगा.
साढ़े पांच वर्ष से अधवार मुसहर बस्ती के लोगों को नहीं मिल रहा नल का जल
सरकार की महती योजना में शामिल मुख्यमंत्री सात निश्चय योजना प्रखंड में हाथी का दांत बनकर रह गयी है
