Kaimur News : कैमूर जिले के चैनपुर प्रखंड की सिरबिट पंचायत में प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभार्थियों से रिश्वत लेने के आरोप में आवास सहायक चुनमुन पासवान के खिलाफ प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है. लगभग एक महीने पहले सोशल मीडिया पर उनका एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वह आवास योजना का लाभ दिलाने के नाम पर लाभुकों से रुपये लेते हुए दिखाई दे रहे थे. मामले की जांच के बाद डीडीसी के निर्देश पर भभुआ पुलिस ने आरोपित आवास सहायक को गिरफ्तार कर लिया. इसके बाद उसे आगे की कार्रवाई के लिए चैनपुर थाना पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया.
वायरल वीडियो के बाद मांगा गया था स्पष्टीकरण
उप विकास आयुक्त (डीडीसी) ने बताया कि सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद मामले का संज्ञान लेते हुए आवास सहायक चुनमुन पासवान से स्पष्टीकरण मांगा गया था. हालांकि, उनके द्वारा दिया गया जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया. इसके बाद नियमानुसार पूरे मामले की सुनवाई की गई और उनसे प्राप्त साक्ष्यों की भी जांच की गई, लेकिन प्रस्तुत किए गए प्रमाण सही नहीं पाए गए.
जांच में सही पाए गए रिश्वत लेने के आरोप
डीडीसी ने बताया कि वीडियो में रुपये देने वाले व्यक्ति से भी पूछताछ की गई. जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि वायरल वीडियो वास्तविक है और उसमें आवास सहायक द्वारा लाभार्थी से रुपये लिए जा रहे थे. जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद उनके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई शुरू की गई.
वायरल वीडियो ने खोली भ्रष्टाचार की पोल
वायरल वीडियो में आरोपित आवास सहायक बिना किसी झिझक के लाभार्थियों से नोटों की गड्डी लेते हुए नजर आ रहे थे. वीडियो सामने आने के बाद पूरे क्षेत्र में इसकी चर्चा शुरू हो गई थी. स्थानीय लोगों के अनुसार, वीडियो में आवास सहायक भारी जैकेट पहने हुए दिखाई दे रहे हैं, जिससे अनुमान लगाया जा रहा है कि यह वीडियो वर्ष 2025 की कड़ाके की ठंड के दौरान रिकॉर्ड किया गया था.
पूरे प्रखंड में निष्पक्ष जांच की उठी मांग
ग्रामीणों का कहना है कि यह मामला केवल सिरबिट पंचायत तक सीमित नहीं है. उन्होंने पूरे चैनपुर प्रखंड में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत हुए आवंटनों की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है. ग्रामीणों का मानना है कि यदि व्यापक जांच कराई जाए तो बड़े स्तर पर अनियमितताओं का खुलासा हो सकता है.
प्रशासनिक कार्रवाई का लोगों ने किया स्वागत
डीडीसी के निर्देश पर हुई त्वरित कार्रवाई की स्थानीय लोगों ने सराहना की है. ग्रामीणों का कहना है कि जनकल्याणकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ इसी तरह सख्त कार्रवाई होती रहनी चाहिए, ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक और पात्र लाभार्थियों तक पारदर्शी तरीके से पहुंच सके.
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