स्कूल में 'भूत का साया': कैमूर में छात्राओं के बेहोश होने के बाद फैला अंधविश्वास, 85 बच्चों की पढ़ाई पर लगा ब्रेक

कैमूर जिले के एक स्कूल में तीन छात्राओं के अचानक बेहोश होने के बाद 'भूत की साया' की अफवाह फैल गई. इस अंधविश्वास के चलते 85 बच्चों की पढ़ाई बंद हो गई है और ग्रामीण अपने बच्चों को स्कूल भेजने से कतरा रहे हैं.

Ghost Rumor Shuts Down Kaimur School : कैमूर जिले के भभुआ नगर अधौरा प्रखंड स्थित उत्क्रमित उच्च मध्य विद्यालय लोहंदी करर में तीन छात्राओं के अचानक बेहोश होने के बाद गांव में अंधविश्वास और अफवाह का माहौल बन गया है. घटना के बाद ग्रामीणों के बीच यह चर्चा फैल गई कि विद्यालय में "भूत की साया" है. इस अफवाह का असर इतना बढ़ गया कि अभिभावकों ने अपने बच्चों को स्कूल भेजना बंद कर दिया है. शिक्षा विभाग के अधिकारी लगातार ग्रामीणों को समझाने और बच्चों को विद्यालय भेजने की अपील कर रहे हैं, लेकिन अभी तक स्थिति सामान्य नहीं हो सकी है.

घटना बीते सोमवार की है, जब विद्यालय में रोज की तरह कक्षाएं संचालित हो रही थीं. इसी दौरान तीन छात्राएं अचानक चक्कर खाकर बेहोश होकर गिर गईं. छात्राओं के बेहोश होते ही विद्यालय परिसर में अफरा-तफरी मच गई. शिक्षकों ने तुरंत छात्राओं की देखभाल शुरू की और इसकी सूचना उनके परिजनों को दी.

विद्यालय पहाड़ी क्षेत्र में स्थित होने के कारण तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं हो सकी. शिक्षकों ने छात्राओं को भभुआ सदर अस्पताल पहुंचाने के लिए वाहन की व्यवस्था करने की कोशिश की, लेकिन इससे पहले ही उनके अभिभावक विद्यालय पहुंच गए और छात्राओं को अपने साथ लेकर चले गए.

Kaimur News : अस्पताल की जगह झाड़-फूंक के सहारे पहुंचे अभिभावक

छात्राओं को इलाज के लिए अस्पताल ले जाने के बजाय परिजन उन्हें झाड़-फूंक कराने के लिए ओझा के पास ले गए. ग्रामीणों के अनुसार ओझा ने बताया कि विद्यालय पर किसी "भूत-प्रेत की साया" का असर है, जिसके कारण छात्राएं बेहोश हुईं.

इसके बाद यह बात तेजी से पूरे गांव में फैल गई. देखते ही देखते ज्यादातर अभिभावकों ने अपने बच्चों को स्कूल भेजना बंद कर दिया. ग्रामीणों का कहना है कि जब तक कथित साया का असर खत्म नहीं होगा, तब तक वे बच्चों को विद्यालय नहीं भेजेंगे.

डीईओ ने किया विद्यालय का निरीक्षण, ग्रामीणों को समझाने का प्रयास

घटना की जानकारी मिलने के बाद जिला शिक्षा पदाधिकारी साकेत रंजन खुद उत्क्रमित उच्च मध्य विद्यालय लोहंदी करर पहुंचे. उन्होंने विद्यालय का निरीक्षण किया और ग्रामीणों व अभिभावकों से बातचीत कर उन्हें समझाने का प्रयास किया.

डीईओ ने कहा कि भूत-प्रेत जैसी कोई बात नहीं है. बच्चों के बेहोश होने के पीछे गर्मी, कमजोरी, डिहाइड्रेशन या कोई अन्य स्वास्थ्य संबंधी कारण हो सकते हैं. उन्होंने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि छात्राओं की चिकित्सकीय जांच कराई जाएगी और किसी भी तरह की अफवाह पर ध्यान नहीं देना चाहिए.

हालांकि इसके बाद भी ग्रामीण अपनी बात पर अड़े रहे और बच्चों को विद्यालय भेजने के लिए तैयार नहीं हुए.

मंगलवार को पहुंचे चार बच्चे, बुधवार को पूरी तरह खाली रहा स्कूल

अफवाह का असर विद्यालय की उपस्थिति पर साफ दिखाई दे रहा है. सोमवार की घटना के बाद मंगलवार को विद्यालय में केवल चार छात्र-छात्राएं पहुंचे. वहीं बुधवार को स्थिति और खराब हो गई और एक भी बच्चा विद्यालय नहीं आया.

विद्यालय में कुल 85 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं, लेकिन अंधविश्वास के कारण पूरा स्कूल लगभग खाली हो गया है. शिक्षकों ने गांव पहुंचकर अभिभावकों से मुलाकात की और बच्चों को नियमित रूप से विद्यालय भेजने की अपील की, लेकिन ग्रामीण फिलहाल अपनी सोच बदलने को तैयार नहीं हैं.

प्रधानाध्यापक ने विभाग को दी पूरी जानकारी

विद्यालय के प्रधानाध्यापक अमरनाथ सिंह ने बताया कि सोमवार को तीन छात्राएं अचानक बेहोश हो गई थीं. शिक्षकों ने तत्काल अभिभावकों को सूचना दी और छात्राओं को अस्पताल ले जाने की तैयारी की थी, लेकिन परिजन उन्हें अपने साथ लेकर चले गए.

उन्होंने बताया कि घटना के बाद विद्यालय में बच्चों की उपस्थिति लगातार घट रही है. मंगलवार को केवल चार बच्चे आए, जबकि बुधवार को कोई भी छात्र विद्यालय नहीं पहुंचा. इस पूरी स्थिति की जानकारी शिक्षा विभाग के अधिकारियों को दे दी गई है.

वहीं जिला शिक्षा पदाधिकारी साकेत रंजन ने बताया कि विद्यालय में किसी भी प्रकार की अलौकिक या रहस्यमयी घटना का कोई प्रमाण नहीं मिला है. बच्चों के बेहोश होने के पीछे स्वास्थ्य संबंधी कारण हो सकते हैं, जिसकी जांच जरूरी है.

उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग लगातार ग्रामीणों को जागरूक करने और अंधविश्वास से दूर रहने के लिए समझाने का प्रयास कर रहा है. विभाग की कोशिश है कि जल्द से जल्द विद्यालय में सामान्य स्थिति बहाल हो और बच्चों की पढ़ाई दोबारा शुरू हो सके.


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लेखक के बारे में

Author: Vinod kumar singh

Published by: Ragini Sharma

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