कैमूर: दुर्गावती में कर्मनाशा नदी में पानी की कमी से कैनाल बंद, बारिश का इंतजार कर रहे किसान; रोपनी प्रभावित

कैमूर के खरीफ सीजन में धान की रोपनी संकट में है. कर्मनाशा नदी में जलस्तर घटने से सिंचाई व्यवस्था चरमरा गई है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है. निजी साधनों से हो रही आंशिक रोपनी के बीच सभी की निगाहें अब मानसून पर टिकी हैं.

Kaimur Farmers Irrigation Problem : कैमूर के खरीफ सीजन में धान की रोपनी के अहम समय पर प्रकृति की बेरुखी किसानों पर भारी पड़ रही है. यूपी-बिहार सीमा पर बहने वाली कर्मनाशा नदी में पर्याप्त जल नहीं होने से क्षेत्र की सिंचाई व्यवस्था प्रभावित हो गई है. नतीजतन धडहर, लरमा और विश्वकर्मा पंप कैनाल बंद पड़े हैं, जिससे किसानों की चिंता बढ़ती जा रही है.

निजी संसाधनों से कर रहे सिंचाई

स्थानीय किसानों का कहना है कि जिनके पास निजी बोरिंग, पंपसेट या अन्य सिंचाई साधन हैं, वे अतिरिक्त खर्च उठाकर किसी तरह धान की रोपाई कर रहे हैं. हालांकि यह सभी किसानों के लिए संभव नहीं है.

वहीं छोटे और सीमांत किसान पूरी तरह बारिश और नहरों पर निर्भर हैं. वे आसमान की ओर टकटकी लगाए मानसून का इंतजार कर रहे हैं, ताकि खेतों में पानी पहुंचे और रोपनी का काम शुरू हो सके.

Kaimur News : रोपनी का समय निकलने की चिंता

धान की रोपनी का समय तेजी से बीतता जा रहा है. यदि जल्द ही पर्याप्त बारिश नहीं हुई और नदी का जलस्तर नहीं बढ़ा, तो इसका सीधा असर फसल उत्पादन पर पड़ेगा. किसान पहले से ही आशंकित हैं कि देरी से रोपनी होने पर पैदावार कम हो सकती है.

Paddy Transplantation : सिंचाई विभाग का पक्ष

सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता ने बताया कि कैनालों में किसी प्रकार की तकनीकी खराबी नहीं है. सभी पंप कैनाल संचालन के लिए तैयार हैं, लेकिन समस्या सिर्फ इतनी है कि नदी में पर्याप्त पानी नहीं है.

उन्होंने कहा कि जैसे ही कर्मनाशा नदी का जलस्तर बढ़ेगा, कैनालों को चालू कर दिया जाएगा. फिलहाल प्राकृतिक परिस्थितियों के कारण स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है.

किसानों की नजरें मानसून पर

दुर्गावती क्षेत्र के किसानों की उम्मीदें अब पूरी तरह मानसून पर टिकी हैं. यदि जल्द बारिश होती है और नदी में जलस्तर बढ़ता है, तो बंद पड़े पंप कैनाल फिर से चालू हो सकेंगे और धान की रोपनी समय पर पूरी हो पाएगी.

दुर्गावती में सिंचाई संकट ने खेती को प्रभावित करना शुरू कर दिया है. जहां बड़े किसान निजी संसाधनों से किसी तरह काम चला रहे हैं, वहीं छोटे किसान पूरी तरह प्रकृति के भरोसे हैं. आने वाले दिनों में बारिश की स्थिति ही तय करेगी कि इस साल किसानों की फसल कैसी होगी.

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Author: Sachidanand singh

Published by: Ragini Sharma

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