Mundeshwari Temple Conservation: बिहार के कैमूर जिले में स्थित देश के प्राचीन जीवंत मंदिरों में शामिल मुंडेश्वरी मंदिर को उसके मूल स्वरूप में संरक्षित और विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल शुरू हो गयी है. मंदिर परिसर का निरीक्षण करने पहुंचे विश्व प्रसिद्ध पुरातत्वविद एवं भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) के पूर्व क्षेत्रीय निदेशक पद्मश्री केके मोहम्मद ने प्रभात खबर से विशेष बातचीत में इसके संरक्षण को लेकर अपनी बात रखी.
उन्होंने कहा कि मुंडेश्वरी मंदिर का पुनरुद्धार मध्य प्रदेश के बटेश्वर मंदिर समूह की तर्ज पर किया जा सकता है. वैज्ञानिक पद्धति और धैर्य के साथ काम किया जाये तो मुंडेश्वरी मंदिर का ऐतिहासिक वैभव और अधिक निखरकर सामने आ सकता है.
बटेश्वर मंदिर समूह की तर्ज पर संरक्षण की बात
केके मोहम्मद ने बताया कि बटेश्वर मंदिर समूह कभी पत्थरों के बिखरे ढेर में तब्दील हो चुका था. वर्षों की उपेक्षा, प्राकृतिक क्षरण और अन्य कारणों से वहां के अधिकांश मंदिर ध्वस्त हो गये थे. एएसआइ ने वहां प्रत्येक पत्थर का सर्वेक्षण किया और उन्हें क्रमांकित किया. इसके बाद वैज्ञानिक तकनीक एनास्टाइलोसिस के माध्यम से उन्हीं मूल पत्थरों को उनकी वास्तविक स्थिति में दोबारा स्थापित किया गया. इसी वजह से आज बटेश्वर मंदिर समूह फिर से अपनी भव्यता के साथ खड़ा है और देश-विदेश के पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बन चुका है.
मूल पत्थरों को वास्तविक स्थिति में स्थापित करने पर जोर
पद्मश्री केके मोहम्मद के अनुसार, मुंडेश्वरी मंदिर के संरक्षण में भी वैज्ञानिक तरीके को अपनाना जरूरी है. मंदिर से जुड़े मूल पत्थरों और स्थापत्य अवशेषों का अध्ययन कर उन्हें उनकी वास्तविक स्थिति में दोबारा स्थापित करने की दिशा में काम किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक पद्धति के साथ धैर्यपूर्वक कार्य किया जाये तो मंदिर की ऐतिहासिक संरचना और वैभव को बेहतर तरीके से सामने लाया जा सकता है.
सफल होगी परियोजना, केके मोहम्मद ने जताया भरोसा
केके मोहम्मद ने कहा कि मुंडेश्वरी मंदिर केवल बिहार ही नहीं, बल्कि पूरे देश की अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर है. इसका संरक्षण आने वाली पीढ़ियों के लिए हमारी जिम्मेदारी है. उन्होंने विश्वास जताया कि राज्य सरकार, पुरातत्व विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों के सहयोग से यह परियोजना सफल होगी. उनका मानना है कि बटेश्वर मॉडल की तरह यदि मुंडेश्वरी मंदिर का वैज्ञानिक पुनरुद्धार किया गया तो यह न केवल अपनी ऐतिहासिक गरिमा को और मजबूती से स्थापित करेगा, बल्कि धार्मिक और विरासत पर्यटन को भी नयी ऊंचाई देगा.
1637 वर्षों से आस्था और इतिहास का अद्भुत संगम
कैमूर जिले के भगवानपुर प्रखंड की लगभग 600 फुट ऊंची पंवरा पहाड़ी पर स्थित मां मुंडेश्वरी देवी का मंदिर भारत के सबसे प्राचीन एवं निरंतर पूजा-अर्चना वाले जीवंत मंदिरों में गिना जाता है. पुरातत्वविदों के अनुसार, यहां मिले शिलालेख 389 ईस्वी के हैं. उत्तर गुप्तकालीन शैली में बना यह दुर्लभ अष्टकोणीय मंदिर अपनी उत्कृष्ट नक्काशी के लिए प्रसिद्ध है.
मंदिर के गर्भगृह में पंचमुखी शिवलिंग और पूर्वी कोने में मां मुंडेश्वरी यानी महिषासुरमर्दिनी की प्रतिमा स्थापित है. श्रद्धालुओं के बीच शिवलिंग का सूर्य की स्थिति के अनुसार रंग बदलता प्रतीत होना भी विशेष आकर्षण का विषय है. मुंडेश्वरी मंदिर करीब 1637 वर्षों से आस्था और इतिहास के अद्भुत संगम के रूप में श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है.
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