चांद. लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान के तहत ग्रामीण क्षेत्रों को स्वच्छ और कचरा मुक्त बनाने के लिए पंचायत स्तर पर व्यवस्था की गयी है. लगभग प्रत्येक गांव में घर-घर से कचरा उठाव के लिए सफाई कर्मियों का चयन किया गया है. पंचायत स्तर पर एक जगह कचरा भंडारण केंद्र भी बनाया गया है, जहां घरों और सार्वजनिक स्थानों से एकत्रित सूखे और गीले कचरे को अलग-अलग रखने की व्यवस्था है. गीले कचरे से जैविक अथवा हरित खाद तैयार करने की योजना भी है.
कई कचरा भंडारण केंद्र उपयोग के अभाव में बेकार
चांद प्रखंड क्षेत्र में अभियान के तहत किए जा रहे कार्यों की स्थिति संतोषजनक नहीं दिखाई दे रही है. कई पंचायतों में लाखों रुपये खर्च कर बनाए गए कचरा भंडारण केंद्र उपयोग के अभाव में बेकार पड़े हैं. केंद्रों पर नियमित रूप से कचरा नहीं पहुंचाया जा रहा है. कई जगहों पर केंद्रों की साफ-सफाई और रखरखाव भी ठीक से नहीं हो रहा है.
कोनहरा गांव के पास फेंका जा रहा कचरा
कोनहरा गांव से घरों का कचरा निकाल कर सफाई कर्मी द्वारा गांव के समीप ही फेंक दिया गया है. यह क्रम लगातार जारी है. इससे बदबू आना शुरू हो गया है और लोगों को आवागमन में काफी परेशानी हो रही है. ग्रामीणों के अनुसार, ऐसी स्थिति कई गांवों में बनी हुई है.
निर्धारित केंद्र के बजाय खाली स्थान पर कचरा
ग्रामीणों के अनुसार, जिन गांवों में कभी-कभार सफाई कर्मियों द्वारा कचरा उठाया भी जाता है, वहां कचरे को निर्धारित कचरा भंडारण केंद्र तक पहुंचाने के बजाय गांव के ही किसी खाली स्थान पर फेंक दिया जाता है. इससे गांव में गंदगी का अंबार लग रहा है. लोगों को दुर्गंध और मच्छर-मक्खियों की समस्या का सामना करना पड़ रहा है. बरसात के दिनों में स्थिति और भी खराब हो जाती है.
कई गांवों में नियमित कचरा उठाव नहीं
कुछ ग्रामीणों का कहना है कि कई गांवों में सफाई कर्मी नियमित रूप से कचरा उठाने के लिए पहुंचते ही नहीं हैं. अभियान के उद्देश्य के अनुरूप प्रतिदिन या निर्धारित अंतराल पर कचरा उठाव होना चाहिए, लेकिन कई स्थानों पर यह व्यवस्था कागजों तक ही सीमित नजर आ रही है.
सफाई कर्मियों की निगरानी पर उठे सवाल
ग्रामीणों का आरोप है कि सफाई कर्मियों द्वारा नियमित रूप से काम नहीं किए जाने के बावजूद इसकी प्रभावी निगरानी नहीं हो पा रही है. इससे घर-घर कचरा उठाव और कचरा प्रबंधन की व्यवस्था प्रभावित हो रही है.
निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल
लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान के कार्यों की निगरानी के लिए प्रखंड मुख्यालय में संबंधित कार्यालय और कर्मियों की व्यवस्था है. पंचायतों में कचरा उठाव, कचरा भंडारण, सूखे-गीले कचरे को अलग रखने तथा स्वच्छता संबंधी गतिविधियों की नियमित मॉनीटरिंग की जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों और कर्मियों की है. इसके बावजूद जमीनी स्तर पर अभियान की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं दिख रहा है.
निरीक्षण से व्यवस्था में सुधार की उम्मीद
ग्रामीणों का कहना है कि यदि संबंधित अधिकारी नियमित रूप से गांवों और कचरा भंडारण केंद्रों का निरीक्षण करें तथा सफाई कर्मियों के कार्यों की वास्तविक स्थिति की जांच करें, तो व्यवस्था में काफी सुधार हो सकता है. लोगों ने प्रशासन से सभी पंचायतों में बने कचरा भंडारण केंद्रों को सक्रिय कराने और घर-घर से नियमित कचरा उठाव सुनिश्चित करने की मांग की है.
लापरवाही पर जिम्मेदारी तय करने की मांग
ग्रामीणों ने काम में लापरवाही बरतने वाले कर्मियों की जिम्मेदारी तय करने की मांग की है. उनका कहना है कि इससे अभियान के उद्देश्य को धरातल पर उतारने के साथ-साथ गांवों को वास्तव में स्वच्छ बनाने में मदद मिलेगी.
जांच के बाद कार्रवाई का बीडीओ ने दिया भरोसा
इस संबंध में प्रखंड विकास पदाधिकारी मोहम्मद हदीद खान ने बताया कि इस मामले में जांच कर कार्रवाई की जायेगी.
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