Kaimur Transport Office Audit Report : कैमूर जिला परिवहन कार्यालय (डीटीओ) में 15.96 करोड़ रुपये की कथित वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है. प्रधान महालेखाकार (एजी) की ऑडिट रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मई 2019 से दिसंबर 2023 के बीच वाहन चालकों से हैंडहेल्ड ई-चालान मशीन के माध्यम से वसूले गए नकद जुर्माने की बड़ी राशि सरकारी खाते में जमा नहीं कराई गई. मामले के सामने आने के बाद विभाग में हड़कंप मच गया है.
Kaimur News : 26.91 करोड़ की वसूली, खाते में पहुंचे सिर्फ 10.96 करोड़
ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, संबंधित अवधि में कुल 26.91 करोड़ रुपये का जुर्माना वसूला गया. हालांकि, सरकारी खाते में केवल 10.96 करोड़ रुपये ही जमा हुए. रिपोर्ट में शेष लगभग 15.96 करोड़ रुपये जमा नहीं होने की बात कही गई है. ऑडिट रिपोर्ट में तत्कालीन डीटीओ, एमवीआई, ईएसआई और कार्यालय कर्मियों की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं.
ऑडिट रिपोर्ट में गंभीर अनियमितताओं का जिक्र
रिपोर्ट के अनुसार, बिहार वित्तीय नियमावली और फरवरी 2020 में जारी विभागीय निर्देशों के तहत हैंडहेल्ड ई-चालान डिवाइस से वसूले गए नकद जुर्माने को अगले कार्य दिवस में सरकारी खाते में जमा करना अनिवार्य था. लेकिन जांच के दौरान कई मामलों में राशि जमा करने से संबंधित अभिलेख उपलब्ध नहीं मिले. ऑडिट टीम ने कैश बुक और जमा रजिस्टर के रखरखाव में भी गंभीर अनियमितताओं की बात कही है.
11 अधिकारियों और कर्मचारियों पर जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया
ऑडिट रिपोर्ट में विभिन्न अधिकारियों और कर्मचारियों से संबंधित राशि का उल्लेख किया गया है. इनमें कार्यालय क्लर्क/नाजिर पर सबसे अधिक 11.68 करोड़ रुपये, हरिशंकर कुमार एवं विनोद कुमार (ईएसआई) पर 2.63 करोड़ रुपये, जबकि अन्य एमवीआई, ईएसआई और तत्कालीन डीटीओ के नाम भी शामिल हैं. विभाग स्तर पर इन सभी से जवाब-तलब की प्रक्रिया शुरू की गई है.
ऑडिट टीम ने दिए सख्त निर्देश
वरिष्ठ लेखापरीक्षा अधिकारी ने जिला परिवहन कार्यालय को सभी वसूली खातों का सत्यापन कर पूरी राशि सरकारी खजाने में जमा कराने तथा संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय कर नियमानुसार कार्रवाई करने का निर्देश दिया है. इसी आधार पर जनवरी 2026 में तत्कालीन डीटीओ रविरंजन कुमार ने संबंधित अधिकारियों और कर्मियों को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा था.
डीटीओ ने क्या कहा
पूर्व डीटीओ रविरंजन कुमार ने बताया कि ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को दो-दो नोटिस जारी कर राशि जमा करने से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा गया था, लेकिन कोई भी उपस्थित नहीं हुआ. वहीं नवपदस्थापित डीटीओ ललित राही ने कहा कि उन्होंने हाल ही में प्रभार ग्रहण किया है और मामले की पूरी जानकारी लेने के बाद ही आगे कुछ कह पाएंगे.
