गांवों को विवाद मुक्त करने की पहल कर रही है न्यायपालिका : जिला जज

शनिवार को भभुआ व्यवहार न्यायालय में लंबित वादों के निपटारे के लिए राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया.

=राष्ट्रीय लोक अदालत का जिला जज ने किया उदघाटन, उमड़े रहे फरियादी =लोक अदालत में लोगों के ट्रैफिक चालान, बैंकिंग सहित अन्य मामलों का हुआ समाधान भभुआ सदर. शनिवार को भभुआ व्यवहार न्यायालय में लंबित वादों के निपटारे के लिए राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया. लोक अदालत में ट्रैफिक चालान, बैंकिंग सहित अन्य मामलों के सुनवाई के लिए काफी संख्या में लोगों की भीड़ उमड़ी रही. जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सहयोग से शनिवार को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत का उद्घाटन जिला व सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार अनुराग ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया. इस दौरान न्यायिक पदाधिकारी, अधिवक्ता सहित अन्य लोग उपस्थित रहे. भभुआ व्यवहार न्यायालय परिसर में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत का उद्घाटन करते हुए प्रधान जिला जज सह अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार अनुराग ने कहा कि सहभागी न्याय तथा न्याय आपके द्वार की अवधारणा को मूर्त रुप देने के बाद न्यायपालिका ने अब गांवों को विवाद मुक्त करने की पहल की है. उन्होंने कहा कि लोक अदालत, पारा लीगल वालेंटियर और अधिवक्ता की इस कार्य में अहम भूमिका है. जिला जज ने कहा कि भारत गांवों का देश है और गांव को विवाद मुक्त बनाकर ही समाज और देश में शांति व विकास लाया जा सकता है. राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकार व बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार ने इस दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है. जिसे मूर्त रुप देने के लिये जिला विधिक सेवा प्राधिकार प्रतिबद्ध है. उन्होंने कहा कि पटना हाईकोर्ट के आदेश पर पूरे बिहार में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालतों में परिवहन चालान के मामलों के रियायती और त्वरित समाधान हेतु विशेष व्यवस्था की गयी है. इसके लिए कैमूर में 4 विशेष बेंचों का गठन किया गया है. जिला जज ने बैंकों से कृषि व ग्रामीण ऋण के मुकदमों में संवेदनशील रुख अपनाने और अधिकाधिक संभव रियायत देने की अपील की है. वहीं, प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश बलजिन्दर पाल ने कहा कि आपसी समझौते के आधार पर मुकदमा खत्म होने पर न कोई जीतता है न कोई हारता है, बल्कि शांति और सद्भाव की विजय होती है. इससे परिवार, समाज और देश की उन्नति होती है. एडीजे विनय प्रकाश तिवारी ने राष्ट्रीय लोक अदालत को सहज, सुलभ और स्थायी न्याय का उत्सव बताया और लोगों से इसमें भाग लेकर विवादों से मुक्ति पाने की अपील की. एडीजे अजीत कुमार मिश्र ने कहा कि लोक कल्याणकारी राज्य की अवधारणा के तहत भारत के सुप्रीम कोर्ट द्वारा लोक अदालत की संकल्पना और कार्यान्वयन हमारे लोकतंत्र की अनूठी उपलब्धि है. इससे विवादों का स्थायी समाधान होता है. जिला अधिवक्ता संघ अध्यक्ष रवींद्र नाथ चौबे ने कहा कि सुलह के आधार पर केश समाप्त होने पर लंबी मुकदमेबाजी से मुक्ति मिल जाती है. क्योंकि लोक अदालत के निर्णय की अपील नहीं होती तो साथ हीं बिना खर्च मुकदमा समाप्त होने से आर्थिक लाभ भी होता है. कार्यक्रम का संचालन करते हुए वरीय अधिवक्ता व रेडक्रॉस सचिव प्रसून कुमार मिश्र ने ट्रैफिक चालान की विसंगतियों पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि गलत पार्किंग का चालान तभी काटा जाना चाहिए जब पार्किंग हेतु स्थान बनाया गया है. छोटे शहरों यथा भभुआ, मोहनिया आदि में पार्किंग जोन नहीं बनाये गये हैं. इसके चलते जरूरी काम से बैंक, अस्पताल, सरकारी कार्यालय आदि आये लोगों को मजबूरन सड़क किनारे या अन्य उपलब्ध स्थान पर गाड़ी लगानी पड़ती है और प्रशासन नो पार्किंग का चालान काट देता है. उन्होंने अधिकारियों से इस समस्या के समाधान की अपील की. जिला विधिक सेवा प्राधिकार की सचिव डाॅ शैल ने राष्ट्रीय लोक अदालत के अंतर्गत मुकदमों के निस्तारण के लिए भभुआ में गठित 13 बेंच और अनुमंडलीय न्यायालय मोहनियां में गठित दो बेंच के बारे में विस्तार से जानकारी दी. किसी प्रकार की समस्या होने पर उन्होंने वाद के पक्षकारों से इसके निमित्त स्थापित हेल्प डेस्क से संपर्क करने का सुझाव दिया. कार्यक्रम में न्यायिक पदाधिकारीगण, लीगल एड डिफेंस काउंसिल जितेंद्र उपाध्याय, अधिवक्ता संघ के कार्यकारी महासचिव विकास शर्मा, अधिवक्ता प्रभाकर दूबे, गोपाल तिवारी व लोक अदालत के वसीम, विनीत तिवारी, धीरज, मेराज और पीएलवी सुनील, हसन सहित काफी संख्या में लोग उपस्थित रहे.

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By Vikash kumar

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